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Jammu News: जय कन्हैया लाल के जयकारों से गूंजा पंडाल
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गांव पृथ्वीपुर में 11 कुंडीय महाविष्णु यज्ञ में शास्त्री ने सुनाई अवतारों की लीलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिश्नाह। गांव पृथ्वीपुर में 11 कुंडीय महाविष्णु यज्ञ के आठवें दिन वीरवार को कथावाचक सुरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतारों की कथा कही। शास्त्री ने संगत को भगवान विष्णु के राम अवतार, कृष्ण अवतार और वामन अवतार की लीलाओं के बारे में बताया।
कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पाप बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। मथुरा में राजा कंस के अत्याचार से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने श्रीकृष्ण रूप में माता देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया, और धर्म व प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया। शास्त्री ने कहा कि जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह अवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा सुनना तभी सार्थक होगा, जब उसके बताए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करेंगे।
सुरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में आनंद भयो जय कन्हैयालाल की, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की, सहित अनेक भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण व वासुदेव जी की झांकी ने श्रोताओं का मनमोह लिया। श्रोताओं ने भगवान का पूजन कर माखन-मिश्री का भोग लगाया। मौके पर महिला व पुरुषों ने नंदोत्सव पर जमकर नृत्य किया। आयोजकों ने भगवान कृष्ण के बालरूप की आरती उतार कर मिठाई, फल, फूल बांटकर उत्सव मनाया।
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बिश्नाह। गांव पृथ्वीपुर में 11 कुंडीय महाविष्णु यज्ञ के आठवें दिन वीरवार को कथावाचक सुरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतारों की कथा कही। शास्त्री ने संगत को भगवान विष्णु के राम अवतार, कृष्ण अवतार और वामन अवतार की लीलाओं के बारे में बताया।
कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पाप बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। मथुरा में राजा कंस के अत्याचार से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने श्रीकृष्ण रूप में माता देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया, और धर्म व प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया। शास्त्री ने कहा कि जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह अवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा सुनना तभी सार्थक होगा, जब उसके बताए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करेंगे।
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सुरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में आनंद भयो जय कन्हैयालाल की, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की, सहित अनेक भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण व वासुदेव जी की झांकी ने श्रोताओं का मनमोह लिया। श्रोताओं ने भगवान का पूजन कर माखन-मिश्री का भोग लगाया। मौके पर महिला व पुरुषों ने नंदोत्सव पर जमकर नृत्य किया। आयोजकों ने भगवान कृष्ण के बालरूप की आरती उतार कर मिठाई, फल, फूल बांटकर उत्सव मनाया।
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