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Jammu News: नारद मुनि थे महान ऋषि, संतों की सेवा का मिला था फल
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अरनिया के नंदपुर में महाविष्णु यज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। अरनिया के नंदपुर गांव में महाविष्णु यज्ञ और भागवत कथा के तीसरे दिन रशपाल शास्त्री ने संगत को संतों की सेवा के बारे में बताया। मौके पर उन्होंने नारद मुनि की जीवनी पर संगत को प्रवचन दिए। कहा कि नारद मुनि एक ऐसे अवतार हुए, जो जब चाहे किसी भी भगवान के पास पहुंच जाते थे। यह उनके पिछले जन्म में की गई संतों की सेवा का फल था।
उन्होंने बताया कि नारद मुनि और उनकी मां ने निरंतर एक महीना संतों की सेवा की। नारद संतों की सेवा में इतने व्यस्त रहते थे कि सुबह से रात तक उनके चरणों में ही समर्पित रहते थे। संतों के लिए खाना, उनकी सेवा करना, उसी को अपना कर्तव्य मानते थे। जब संतों का जाना हुआ तो नारद ने कहा कि संतों मुझे अपने साथ ले चलें। संतों ने कहा कि साथ तो नहीं ले जा सकते, परंतु जो सेवा तुमने की है उसका फल तुम्हें अवश्य देंगे। जब भी तुम भगवान के मंत्र का जाप करोगे तो तुरंत भगवान के पास पहुंच जाया करोगे।
उन्होंने बताया कि संतों की सेवा ही एकमात्र सभी दुखों का उपाय है। संत सिर का ताज होते हैं, और हाथ व माथे की तकदीर को भी बदल देते हैं। इसलिए, कलयुग में संतों के प्रति लोगों को प्रेम होना चाहिए। संतों का आदर करना चाहिए। उससे ही मनुष्य जन्म सफल हो जाता है। मंगलवार को महाविष्णु यज्ञ और भागवत कथा का तीसरा दिन था। सुबह 8 बजे हवन शुरू कर दिया गया था। उसके बाद शास्त्री ने संगत को प्रवचन दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। अरनिया के नंदपुर गांव में महाविष्णु यज्ञ और भागवत कथा के तीसरे दिन रशपाल शास्त्री ने संगत को संतों की सेवा के बारे में बताया। मौके पर उन्होंने नारद मुनि की जीवनी पर संगत को प्रवचन दिए। कहा कि नारद मुनि एक ऐसे अवतार हुए, जो जब चाहे किसी भी भगवान के पास पहुंच जाते थे। यह उनके पिछले जन्म में की गई संतों की सेवा का फल था।
उन्होंने बताया कि नारद मुनि और उनकी मां ने निरंतर एक महीना संतों की सेवा की। नारद संतों की सेवा में इतने व्यस्त रहते थे कि सुबह से रात तक उनके चरणों में ही समर्पित रहते थे। संतों के लिए खाना, उनकी सेवा करना, उसी को अपना कर्तव्य मानते थे। जब संतों का जाना हुआ तो नारद ने कहा कि संतों मुझे अपने साथ ले चलें। संतों ने कहा कि साथ तो नहीं ले जा सकते, परंतु जो सेवा तुमने की है उसका फल तुम्हें अवश्य देंगे। जब भी तुम भगवान के मंत्र का जाप करोगे तो तुरंत भगवान के पास पहुंच जाया करोगे।
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उन्होंने बताया कि संतों की सेवा ही एकमात्र सभी दुखों का उपाय है। संत सिर का ताज होते हैं, और हाथ व माथे की तकदीर को भी बदल देते हैं। इसलिए, कलयुग में संतों के प्रति लोगों को प्रेम होना चाहिए। संतों का आदर करना चाहिए। उससे ही मनुष्य जन्म सफल हो जाता है। मंगलवार को महाविष्णु यज्ञ और भागवत कथा का तीसरा दिन था। सुबह 8 बजे हवन शुरू कर दिया गया था। उसके बाद शास्त्री ने संगत को प्रवचन दिए।
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