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परिणय सूत्र में बांधते हैं प्रभु बलराम, शादी के लिए जम्मू के ऐतिहासिक मंदिर पहुंचेंगे युवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 01 Sep 2018 03:39 PM IST
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बलराम मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम (बलभद्र) को भाई बनाकर देशभर की कई युवतियों को वैवाहिक जीवन का सुख मिला है। सूर्य पुत्री तवी किनारे पंजतीर्थी धौंथली ढक्की जम्मू स्थित बलराम जी के ऐतिहासिक मंदिर में रक्षाबंधन पर विशेष तौर पर युवतियां उन्हें राखी बांधकर अपनी शादी की कामना करती हैं।
ऐसी मान्यता है कि प्रभु के चरणों में श्रद्धा से मांगी गई यह कामना एक साल के भीतर पूरी हो जाती है। इसी तरह जिन युवकों की शादी में रुकावट आती है वे भी प्रभु बलराम के चरणों में मन से लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं। उसके बाद बलराम जी की कृपा से वे भी परिणय सूत्र में बंध जाते हैं। देश में दो ही बलराम जी के मंदिर हैं। एक मथुरा के वृंदावन में और दूसरा जम्मू में।
मंदिर के पुजारी अश्विनी कुमार ने बताया कि बलराम जी का यह मंदिर करीब 350 साल वर्ष पुराना है। इसका डुग्गर शासक महाराजा रणवीर सिंह ने निर्माण कराया था। मंदिर में भगवान बलराम के साथ उनकी पत्नी रेवती महारानी की मूर्ति भी स्थापित है। मौजूदा धर्मार्थ ट्रस्ट के अधीन मंदिर का रखरखाव हो रहा है। जिन युवक और युवतियों की शादी में कोई रुकावट आती है, वे प्रभु बलराम के चरणों में आशीर्वाद पाकर खुशहाल वैवाहिक जीवन पाते हैं।
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मंदिर में जन्माष्टमी और बलराम जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान बलराम का जन्म भगवान श्रीकृष्ण से आठ दिन पहले रक्षाबंधन पर हुआ था। रक्षाबंधन के बाद आने वाले रविवार (2 सितंबर) को मंदिर में विशाल भंडारा लगाया जा रहा है। जन्माष्टमी पर मंदिर में काफी रौनक रहती है। प्रभु की विधि पूर्वक पूजा-अर्चना के साथ भगवान कृष्ण जी का झूला लगाया जाता है।
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ऐसी मान्यता है कि प्रभु के चरणों में श्रद्धा से मांगी गई यह कामना एक साल के भीतर पूरी हो जाती है। इसी तरह जिन युवकों की शादी में रुकावट आती है वे भी प्रभु बलराम के चरणों में मन से लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं। उसके बाद बलराम जी की कृपा से वे भी परिणय सूत्र में बंध जाते हैं। देश में दो ही बलराम जी के मंदिर हैं। एक मथुरा के वृंदावन में और दूसरा जम्मू में।
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मंदिर के पुजारी अश्विनी कुमार ने बताया कि बलराम जी का यह मंदिर करीब 350 साल वर्ष पुराना है। इसका डुग्गर शासक महाराजा रणवीर सिंह ने निर्माण कराया था। मंदिर में भगवान बलराम के साथ उनकी पत्नी रेवती महारानी की मूर्ति भी स्थापित है। मौजूदा धर्मार्थ ट्रस्ट के अधीन मंदिर का रखरखाव हो रहा है। जिन युवक और युवतियों की शादी में कोई रुकावट आती है, वे प्रभु बलराम के चरणों में आशीर्वाद पाकर खुशहाल वैवाहिक जीवन पाते हैं।
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मंदिर में जन्माष्टमी और बलराम जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान बलराम का जन्म भगवान श्रीकृष्ण से आठ दिन पहले रक्षाबंधन पर हुआ था। रक्षाबंधन के बाद आने वाले रविवार (2 सितंबर) को मंदिर में विशाल भंडारा लगाया जा रहा है। जन्माष्टमी पर मंदिर में काफी रौनक रहती है। प्रभु की विधि पूर्वक पूजा-अर्चना के साथ भगवान कृष्ण जी का झूला लगाया जाता है।
21 परिक्रमा लेने से दूर होता है कालसर्प दोष
बलराम जी के मंदिर की 21 दिन लगातार 21 परिक्रमा लेने से कुंडली में कालसर्प दोष दूर होता है। कालसर्प दोष होने से अधिकतर कार्यों में अड़चन रहती है। परिक्रमा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रभु के चरणों में चांदी का नाग, नागिन का जोड़ा चढ़ाया जाता है। शेषनाग का अवतार कहे जाने वाले प्रभु बलराम के दरबार में हाजिरी देने से दुखों का निवारण होता है।