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बड्डाल में मौतों का सिलसिला: राजोरी से जम्मू पहुंचे नौ बच्चों में से आठ की मौत, क्या कुछ छिपाया जा रहा है?

Sat, 18 Jan 2025 11:11 AM IST
निकिता गुप्ता अमित कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमित कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sat, 18 Jan 2025 11:11 AM IST
सार

बड्डाल गांव में बच्चों की मौतों का सिलसिला जारी है, जहां प्रशासन ने समय पर प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से मदद नहीं ली, जिससे मौतों को रोकने में चूक हुई।

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Series of deaths in Baddal: Eight out of nine children who reached Jammu from Rajori died
बड्डाल-एक के बाद एक मौतें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजोरी के बड्डाल गांव में एक के बाद एक मौतें होती रहीं। प्रशासन और पूरा स्वास्थ्य अमला जांच में जुटा रहा। लेकिन विशेष उपचार के लिए पीड़ितों को देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में भेजने में ढिलाई बरती गई। राजोरी से जम्मू में नौ मासूमों को भेजा गया, मगर बेहतर उपचार के दावों के बावजूद आठ ने दम तोड़ दिया और एक बच्ची जिंदगी से लड़ रही है। हालांकि एक पीड़ित बच्चे को पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया था, लेकिन उसने भी रास्ते में दो तोड़ दिया था। विशेषज्ञों की मानें तो जांच के साथ मानव जीवन को बचाने के लिए इलाज में प्रतिष्ठित संस्थानों की मदद ली जानी चाहिए थी।

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मानव जीवन को बचाने में प्राथमिकता होनी चाहिए थी-पूर्व निदेशकस्वास्थ्य विभाग के पूर्व डीजी व स्वास्थ्य निदेशक ने नाम न छापने पर बताया कि अगर सरकार न्यूरोटॉक्सिन मिलने की बात कर रही है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि लोगों को पता चल सके कि कौन से जहर से बड्डाल के पीड़ित मरे हैं।
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एक पहलू यह भी है कि लगातार मौतों के बाद पीड़ितों को तत्काल देश के पीजीआई चंडीगढ़ और दिल्ली एम्स जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों तक भेजने की पहल क्यों नहीं की गई। हमें स्वीकार करना चाहिए था कि हम ऐसी मौतों को रोकने में सक्षम नहीं हैं। ऐसी घटनाओं में मानव जीवन को बचना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सभी उच्चतम स्रोतों तक पहुंच बनाई जानी चाहिए थी।
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अगर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पीड़ितों को पहुंचाया जाता तो शायद नतीजे अलग होते। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश में डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस लचर चिकित्सा प्रणाली का एक बड़ा कारण रही है। इसमें कार्यालय समय के बाद अमूमन अस्पतालों में वरिष्ठ डाक्टरों की मौजूदगी न होने की बात कही जाती रही है।

बीमारी को पकड़ने में चूक हुई, एसआईटी के बजाय सीबीआई से जांच करवाएं-सुकेश
सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश सी खजूरिया ने कहा कि बड्डाल मामले में पीड़ितों की बीमारी को पूरी तरह से पकड़ने में चूक हुई है। अगर सरकारमान रही है कि किसी वायरस से नहीं, बल्कि न्यूरोटॉक्सिन मौत का कारण लग रहा है, तो उन्हें बताना चाहिए कि हमने अस्पतालों में पीड़ितों के न्यूरोटॉक्सिन के बेहतर उपचार के लिए क्या व्यवस्थाएं कीं।

जब मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा था तो हमें देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में पीड़ितों को भेजने में प्राथमिकता देनी चाहिए थी, जिससे शायद परिणाम अलग होते। उन्होंने संविधान के अधिनियम 21 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी मौतों पर सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना होता है, लेकिन इसके लिए सभी उचित उपाय नहीं किए गए। अगर स्वास्थ्य विभाग को मौतों पर कोई आपराधिक एंगल लग रहा है तो एसआईटी के बजाय इसकी सीबीआई जांच करवाई जानी चाहिए, ताकि असलियत को सामने लाया जा सके।

एसएमजीएस अस्पताल में हुई बच्चों की मौत
 
8 दिसंबर रुक्सान अहमद (10)
12 दिसंबर रफ्तार अहमद (4)
18 दिसंबर इश्फाक अहमद (12) की एसएमजीएस से पीजीआई चंडीगढ़ भेजते समय रास्ते में मौत 
12 जनवरी नवीना कौसर (9), जहूर अहमद (14)
13 जनवरी मोहम्मद मारूफ (10)
14 जनवरी सफीना कौसर (12)
15 जनवरी जबीना कौसर (10)

क्या कहते हैं रेफरल मानकमुख्य रूप से मरीज को केवल तभी रेफर किया जाता है जब अस्पताल की सेवा व्यवस्था में संबंधित उपकरण/विशेषज्ञ उपलब्ध न हों।

मरीज की गंभीर स्थिति पर विशेषज्ञों की राय के बाद उसे दूसरे बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जाता है। 
 
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