{"_id":"639e24b7782c9c004a61b150","slug":"seminar-city-reporter-news-jmu2746066130","type":"story","status":"publish","title_hn":"तवांग में चीनी सैनिकों की घुसपैठ सुनियोजित : पेनपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तवांग में चीनी सैनिकों की घुसपैठ सुनियोजित : पेनपा
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जम्मू। तिब्बत के प्रधानमंत्री (निर्वासित सरकार) पेनपा शेरिंग ला ने तवांग में चीनी सैनिकों की घुसपैठ को सुनियोजित बताया है। उनका दावा है कि तवांग में इंसानी बस्ती नहीं है। ऐसे में चीन ने भारतीय भूमि खासतौर से सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण सेना की ऊंचाई वाली पोस्ट को कब्जाने के लिए सैनिकों की घुसपैठ करवाई। यह बातें जम्मू में शनिवार को भारत तिब्बत संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र पहले मुख्य अतिथि पेनपा शेरिंग ला ने प्रेसवार्ता में कही हैं।
उन्होंने कहा चीन शांति में विश्वास रखने वाला देश नहीं है। वह कभी उस देश का सम्मान नहीं करता जो उसके सामने झुक जाता है। भारत अब 1962 वाला देश नहीं है। वर्तमान में चीन के हर दुस्साहस का जवाब देने में भारत सक्षम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में भारत के पास मजबूत नेतृत्व है। भारत शांति में विश्वास रखने वाला देश है। हालांकि, चीन के मामले में भारत को अपनी स्थिति को मजबूत करना होगा। तिब्बत के साथ भारत के हमेशा मधुर संबंध रहे हैं। तिब्बती भारतीयों को सम्मान और अपने गुरु के घर के तौर पर देखते हैं। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन की नहीं बल्कि तिब्बत की सीमा है। ऐसे में भारत और तिब्बत के मध्य जो कोई भी सीमा विवाद है उसका हल हम खुद कर सकते हैं। तिब्बत को स्वायत्तता दिला कर चीन की विस्तारवादी सोच को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा तिब्बत में चीन मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ा रहा है। बच्चों को तिब्बती भाषा व संस्कृति तक से दूर करने की साजिश के तहत चीन काम कर रहा है। यह भारत के हित में नहीं है।
तिब्बत की आजादी नहीं, स्वायत्तता पर जोर
तिब्बत के प्रधानमंत्री पेनपा शेरिंग ला ने कहा कि हम वर्तमान में तिब्बत की आजादी नहीं, बल्कि स्वायत्तता चाहते हैं। हमारे गुरु दलाई लामा हिंसा में यकीन नहीं रखते। वैसे भी चीन हमारा पड़ोसी देश है। ऐसे में पड़ोसियों को बदला नहीं जा सकता। तिब्बत को स्वायत्तता मिलने से कई मसलों का हल होगा और भारत के हित में भी यह ठीक रहेगा। तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे के खिलाफ हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार मामले को उठाया है। बड़े देशों से भी बात की, लेकिन किसी ने भी चीन का खुलकर विरोध नहीं किया। विश्वास है कि बदलाव होगा और हमारी जीत होगी।
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उन्होंने कहा चीन शांति में विश्वास रखने वाला देश नहीं है। वह कभी उस देश का सम्मान नहीं करता जो उसके सामने झुक जाता है। भारत अब 1962 वाला देश नहीं है। वर्तमान में चीन के हर दुस्साहस का जवाब देने में भारत सक्षम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में भारत के पास मजबूत नेतृत्व है। भारत शांति में विश्वास रखने वाला देश है। हालांकि, चीन के मामले में भारत को अपनी स्थिति को मजबूत करना होगा। तिब्बत के साथ भारत के हमेशा मधुर संबंध रहे हैं। तिब्बती भारतीयों को सम्मान और अपने गुरु के घर के तौर पर देखते हैं। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन की नहीं बल्कि तिब्बत की सीमा है। ऐसे में भारत और तिब्बत के मध्य जो कोई भी सीमा विवाद है उसका हल हम खुद कर सकते हैं। तिब्बत को स्वायत्तता दिला कर चीन की विस्तारवादी सोच को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा तिब्बत में चीन मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ा रहा है। बच्चों को तिब्बती भाषा व संस्कृति तक से दूर करने की साजिश के तहत चीन काम कर रहा है। यह भारत के हित में नहीं है।
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तिब्बत की आजादी नहीं, स्वायत्तता पर जोर
तिब्बत के प्रधानमंत्री पेनपा शेरिंग ला ने कहा कि हम वर्तमान में तिब्बत की आजादी नहीं, बल्कि स्वायत्तता चाहते हैं। हमारे गुरु दलाई लामा हिंसा में यकीन नहीं रखते। वैसे भी चीन हमारा पड़ोसी देश है। ऐसे में पड़ोसियों को बदला नहीं जा सकता। तिब्बत को स्वायत्तता मिलने से कई मसलों का हल होगा और भारत के हित में भी यह ठीक रहेगा। तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे के खिलाफ हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार मामले को उठाया है। बड़े देशों से भी बात की, लेकिन किसी ने भी चीन का खुलकर विरोध नहीं किया। विश्वास है कि बदलाव होगा और हमारी जीत होगी।
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