फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Seed germ plasm will open in this place of Jammu-Kashmir, research will be done on medicinal plants

जम्मू-कश्मीर की इस जगह खुलेगा सीड जर्म प्लाज्म, औषधीय पौधों पर होगा शोध

Wed, 14 Apr 2021 03:11 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 14 Apr 2021 03:11 PM IST
सार

तीन पाली हाउस में भी जम्मू-कश्मीर के औषधीय पौधों का निर्माण किया जाएगा। ठनटेरा (बस्ती) में नर्सरी और प्लाज्म केंद्र के लिए करीब 55 कनाल भूमि उपलब्ध है।

विज्ञापन
Seed germ plasm will open in this place of Jammu-Kashmir, research will be done on medicinal plants
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

भद्रवाह में बन रहे इंस्टीट्यूट ऑफ हाई ऑल्टीट्यूड मेडिसिनल प्लांट संस्थान में जल्द ही सीड (बीज) जर्म प्लाज्म केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। देशभर में गिने चुने ऐसे संस्थानों में यहां भी ऐसा केंद्र स्थापित होगा। इस केंद्र में जम्मू-कश्मीर के बहुमूल्य औषधीय पौधों के बीजों का निर्माण, संरक्षण और वितरण किया जाएगा। इसके अलावा तीन औषधीय पौधों की नर्सरी का भी निर्माण किया जा रहा है।

विज्ञापन


भद्रवाह कस्बे से दस किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र ठनटेरा में आधुनिक नर्सरी (पाली हाउस) और सीड जर्म प्लाज्म केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। कुछ हफ्तों में इसका निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। सीड जर्म प्लाज्म केंद्र में बीज के संरक्षण से वनीकरण को बढ़ावा देने के साथ किसानों को औषधीय पौधे लगाने के लिए सीधा लाभ मिलेगा।
विज्ञापन


इसमें लुप्त व अन्य औषधीय पौधों के बीज को तैयार किया जाएगा। प्लाज्म केंद्र में प्री फैबरिक और कंकरीट के निर्माण होंगे। इस तरह के केंद्र हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्र पालमपुर में स्थापित हैं। भद्रवाह के जंगल और पहाड़ हिमालय शृंखला से जुड़े हैं। इसमें कई अनमोल औषधीय पौधे प्राकृतिक तौर पर लगते हैं, जिनकी आयुष जगत में भारी मांग है। इन पौधों के माध्यम से स्थानीय लोग पुरानी चिकित्सा पद्धति से लोगों का उपचार कर रहे हैं, लेकिन इन औषधीय पौधों का सही विस्तार नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले, छह महीने बाद एक दिन में 1269 नए संक्रमित


इन प्राकृतिक औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए भद्रवाह के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों का वातावरण अनुकूल रहा है। इसी तरह तीन आधुनिक नर्सरी में उन औषधीय पौधों को तवज्जो दी गई है जिनकी देश विदेश में आयुष दवा उद्योग में भारी मांग है। यह औषधीय पौधे अधिकतर हिमालय शृंखला में लगते हैं। स्कास्ट जम्मू के वैज्ञानिकों की मदद से नर्सरी में पौधों का उत्पादन किया जाएगा।

इसमें प्रमुख पुष्करमूल (एंटिसैप्टिक व संक्रमण रोकथाम के लिए), पत्रिस (सामान्य ताकत का टॉनिक), रेबंद (जख्म व सूजन के लिए) कुछ (एंटिसैप्टिक, एंटी वायरल) और दारुल हल्की (मधुमेह की रोकथाम के लिए) शामिल हैं। ठनटेरा (बस्ती) में नर्सरी और प्लाज्म केंद्र के लिए करीब 55 कनाल भूमि उपलब्ध है। आईएसएम के निदेशक डॉ. मोहन सिंह ने बताया कि भद्रवाह के उच्च पर्वतीय औषधीय पौधा संस्थान पर काम हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed