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Jammu News: मुठभेड़ के एक हफ्ते बाद भी बसंतगढ़ में छिपे आतंकियों का सुराग नहीं, घेरा सख्त
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- घने जंगल और प्राकृतिक गुफाओं का सहारा लेने का शक
- इन दहशतगर्दों के लिए काम करने वाला कोई भी मददगार पकड़ा नहीं गया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। उधमपुर के बसंतगढ़ में एक सप्ताह पहले सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ के बाद छिपे आतंकियों की तलाश अब भी जारी है। पुलिस का दावा है कि कड़ी घेराबंदी की गई है। उम्मीद है कि आतंकी जिले से बाहर नहीं गए हैं, क्योंकि पूरा इलाका घने जंगल और प्राकृतिक गुफाओें वाला है। इससे भी आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने में चुनौती बनी हुई है। अभी तक इन दहशतगर्दों के लिए काम करने वाला कोई भी मददगार पकड़ा नहीं गया है।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि आतंकियों को जब कभी भी घेरें, कोशिश हो कि ऑपरेशन को दिन में ही समाप्त करें और इस हिसाब से ही इनकी घेराबंदी की जाए।
वैद का कहना है कि कश्मीर और जम्मू संभाग में अंतर है। वहां आतंकी मैदानी इलाकों में छिपे होते थे, घेराबंदी के बाद वे भाग नहीं पाते थे। रात होने पर हम पूरी रोशनी से घेरा बनाए रखते थे। लेकिन, जम्मू संभाग के कठुआ, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजोरी और पुंछ जैसे क्षेत्रों में घने जंगल हैं। यहां आतंकियों की सूचना पर हर जगह सुरक्षाबलों के वाहन नहीं पहुंच पाते, इसलिए जब भी इन आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिले, तब दिन में ऑपरेशन लांच करें। ऐसा सुरक्षा घेरा बनाएं, जिससे वे भाग न सकें और रात होने से पहले मारे जाएं।
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सेना के पूर्व बिग्रेडियर विजय सागर का कहना है कि आतंकियों द्वारा घने जंगल में गुफाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ये आतंकी बहुत ही प्रशिक्षित हैं, जिन्हें जंगल में रहने की पूरी जानकारी है। इनको मारने के लिए सेना को अब हवाई हमले करने की जरूरत है।
घेरा वैसे ही, बताना मुश्किल कि आतंकी भाग गए या वहीं है
बसंतगढ़ का इलाका काफी घने जंगल वाला है। आतंकियों की तलाश में जिस ताकत से ऑपरेशन शुरू किया था, उसी ताकत के साथ अब भी आतंकियों की तलाश की जा रही है। अभी बताना संभव नहीं है कि आतंकी भाग गए या वहीं हैं।
भीमसेन टूटी, आईजी, जम्मू
26 जून को मारा गया था आतंकी
बता दें कि 26 जून को आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई थी। इसमें पाकिस्तानी आतंकी माैलवी मारा गया था, जो जैश का कमांडर बताया जा रहा है। आतंकी का शव बरामद किया गया था। इसके शव के पास एम 4 कारबाइन जैसे हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ था।
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- इन दहशतगर्दों के लिए काम करने वाला कोई भी मददगार पकड़ा नहीं गया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। उधमपुर के बसंतगढ़ में एक सप्ताह पहले सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ के बाद छिपे आतंकियों की तलाश अब भी जारी है। पुलिस का दावा है कि कड़ी घेराबंदी की गई है। उम्मीद है कि आतंकी जिले से बाहर नहीं गए हैं, क्योंकि पूरा इलाका घने जंगल और प्राकृतिक गुफाओें वाला है। इससे भी आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने में चुनौती बनी हुई है। अभी तक इन दहशतगर्दों के लिए काम करने वाला कोई भी मददगार पकड़ा नहीं गया है।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि आतंकियों को जब कभी भी घेरें, कोशिश हो कि ऑपरेशन को दिन में ही समाप्त करें और इस हिसाब से ही इनकी घेराबंदी की जाए।
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वैद का कहना है कि कश्मीर और जम्मू संभाग में अंतर है। वहां आतंकी मैदानी इलाकों में छिपे होते थे, घेराबंदी के बाद वे भाग नहीं पाते थे। रात होने पर हम पूरी रोशनी से घेरा बनाए रखते थे। लेकिन, जम्मू संभाग के कठुआ, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजोरी और पुंछ जैसे क्षेत्रों में घने जंगल हैं। यहां आतंकियों की सूचना पर हर जगह सुरक्षाबलों के वाहन नहीं पहुंच पाते, इसलिए जब भी इन आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिले, तब दिन में ऑपरेशन लांच करें। ऐसा सुरक्षा घेरा बनाएं, जिससे वे भाग न सकें और रात होने से पहले मारे जाएं।
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सेना के पूर्व बिग्रेडियर विजय सागर का कहना है कि आतंकियों द्वारा घने जंगल में गुफाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ये आतंकी बहुत ही प्रशिक्षित हैं, जिन्हें जंगल में रहने की पूरी जानकारी है। इनको मारने के लिए सेना को अब हवाई हमले करने की जरूरत है।
घेरा वैसे ही, बताना मुश्किल कि आतंकी भाग गए या वहीं है
बसंतगढ़ का इलाका काफी घने जंगल वाला है। आतंकियों की तलाश में जिस ताकत से ऑपरेशन शुरू किया था, उसी ताकत के साथ अब भी आतंकियों की तलाश की जा रही है। अभी बताना संभव नहीं है कि आतंकी भाग गए या वहीं हैं।
भीमसेन टूटी, आईजी, जम्मू
26 जून को मारा गया था आतंकी
बता दें कि 26 जून को आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई थी। इसमें पाकिस्तानी आतंकी माैलवी मारा गया था, जो जैश का कमांडर बताया जा रहा है। आतंकी का शव बरामद किया गया था। इसके शव के पास एम 4 कारबाइन जैसे हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ था।