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Jammu News: अखनूर के कमांडर जतिंदर पाल सिंह समुद्रयान मिशन की करेंगे अगुवाई

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Samudrayaan Mission
समुद्र की 6000 मीटर गहराई में 12 घंटे रहेंगे, धातुओं और खनिजों की होगी खोज
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अतुल सूदन
अखनूर। अखनून के कमांडर जतिंदर पाल सिंह समुद्रयान मिशन की अगुवाई करेंगे। मिशन समुद्रयान में तीन लोगों को एक स्वदेशी सबमर्सिबल में बैठाकर 6 किमी की गहराई तक भेजा जाएगा, ताकि वहां के स्रोतों और जैव-विविधता का अध्ययन किया जा सके। इसके जरिये समुद्र में कोबाल्ट, निकल और मैगनीज जैसी बहुमूल्य धातुओं और खनिजों की खोज की जाएगी।

अखनूर के टांडा गांव के रहने वाले कमांडर जतिंदर पाल सिंह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओसन टेक्नोलॉजी, चेन्नई में बतौर वैज्ञानिक तैनात हैं। वे सेवानिवृत्त ऑनरेरी कैप्टन मनमोहन सिंह के बेटे हैं। भारतीय नौसेना के अनुभवी अधिकारी रहे जतिंदर पाल सिंह के नाम कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं। उन्होंने अब तक का सबसे गहरा गोता 670 मीटर तक लगाया है। वह भारतीय नौसेना की खास डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल की कमीशनिंग टीम के सदस्य भी रह चुके हैं।
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कमांडर जतिंदर पाल सिंह इस मिशन में पनडुब्बी के पायलट के रूप में काम करेंगे। उनके पास भारतीय नौसेना में गहरे समुद्र में काम करने का व्यापक अनुभव है, जो इस मिशन की सफलता के लिए बेहद जरूरी है। समुद्रयान मिशन, देश को समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें कमांडर जतिंदर पाल सिंह का योगदान न केवल अखनूर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
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जानिए, क्या है समुद्रयान मिशन

समुद्रयान पूरी तरह से एक स्वदेशी परियोजना है। इसका विकास पृथ्वी विज्ञान के अंतर्गत आने वाले चेन्नई स्थित राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) ने किया है। इस मिशन के तहत मत्स्य-6000 पनडुब्बी का विकास किया गया है। यह पनडुब्बी समुद्र तल से 6000 मीटर की गहराई में जाने में सक्षम होगी। यही नहीं इतनी गहराई में 600 गुना से ज्यादा बढ़ने वाले दबाव को झेलने में यह सक्षम है। इस पनडुब्बी का निर्माण 80 मीटर मोटे टाइटेनियम मिश्रित धातु से किया गया है।
समुद्र के भीतर 6000 मीटर की गहराई में कई अनुसंधान होंगे। मत्स्य-6000 पनडुब्बी का विकास इसी मिशन का हिस्सा है। इसके जरिये तीन लोगों को 6000 मीटर की गहराई में 12 घंटे के लिए भेजा जाएगा। आपातकालीन स्थिति में यह 96 घंटे तक टिकी रह सकती है। उम्मीद है कि इस मिशन को 2026 में लॉन्च किया जाएगा। अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस और चीन के बाद ऐसा सबमरीन बनाने वाला भारत छठा देश बन गया है।

मेरे लिए गर्व की बात
यह मेरे लिए गर्व की बात है। राष्ट्र सर्वोपरि ही मेरा सिद्धांत है। साथ मिलकर हम आगे बढ़ेंगे और अपने देश के तिरंगे को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे, चाहे वह सागर की गहराई हो या चांद की ऊंचाई।
-जतिंदर पाल सिंह

नंबर गेम -
मिशन की अनुमानित लागत 4077 करोड़
अभी तक आवंटित बजट 1400 करोड़
मिशन का उद्देश्य ब्लू इकॉनमी के लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
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