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Jammu News: एटीएफ ओपीडी में 29 नशे के आदी करवा रहे उपचार
Sun, 02 Nov 2025 01:42 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 02 Nov 2025 01:42 AM IST
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सांबा। दिन प्रतिदिन बढ़ रहे नशे के कारोबार में युवा वर्ग अधिक प्रभावित हो रहा है। पहले नशा पंजाब में ही था, आहिस्ता आहिस्ता कठुआ से होते हुए सांबा जिला में भी फैलने लगा। अब चिट्ठा ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैलता जा रहा है। सरकार की और से भी नशे के खिलाफ कई प्रकार के अभियान चलाए जा रहे हैं।
इसमें नशा मुक्त केंद्र व अब सरकारी अस्पतालों में एटीएफ ओपीडी शुरू की जा रही है। जिला अस्पताल में एटीएफ ओपीडी में 29 लोगों का उपचार चल रहा है। इस में दो युवक जो चिट्ठा, की लत में फंस चुके थे, दवा भी जारी रखे हुए है। वहीं अब वह रोजगार भी कर रहे हैं। काल्पनिक नाम नितिन का कहना है कि उन के एक दोस्त जिस के पिता का अच्छा कारोबार है ने मुझे नशे की लत में फंसाया था। उन के अनुसार एक दिन उन का दोस्त आया उस के पास चिट्ठा था उस ने मुझे बताया कि इस का बहुत मजा आता है, एक बार चखकर देखो मैंने काफी मना किया बार-बार मजबूर करने पर मैंने चिट्ठा की खुराक ले ली वह मस्त हो गया। दूसरे दिन फिर मेरा दोस्त आया व दोनों ने बैठकर चिट्ठा का मजा लिया। इसके बाद मुझे आदत लगने लगी। पहले घर से पैसे मांग कर अपना नशा पूरा करने लगा। बाद में घर में रखे पैसे चुराने लगा। एक दिन मुझे कहीं से पैसे नही मिले तो मेरा शरीर दर्द करने लगा, रात को नींद नहीं आई अगले दिन मैंने किसी रिश्ते से उधार मांग कर अपना नशा पूरा किया। जब मेरे परिवार को पता चला तो उन्होंने मुझे जिला अस्पताल एटीएफ ओपीडी में पहुंचाया। वहां पर मैं ने एक माह तक उपचार करवाया, दवा शुरू की तो उसे लगा की वह अब गलत रास्ते पर नहीं जांउगा। मैंने दवा जारी रखी। आज में रोजगार कर रहा हूं। वहीं दवा आज भी जारी रखे हुए हूं।
कोट
नशे की लत में स्कूली छात्र अधिक फंस रहे हैं। धनवान युवक अन्यों को इस दलदल में फंसा रहे हें। उन के पास 15 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक के लोग आ रहे हैं। वहीं 15 से 25 वर्ष की आयु तक नशे के आदी युवकों की मौतें हुई हैं। है। नशा मुक्त अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
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डॉ विजय भारती, एटीएफ केंद्र सांबा।
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इसमें नशा मुक्त केंद्र व अब सरकारी अस्पतालों में एटीएफ ओपीडी शुरू की जा रही है। जिला अस्पताल में एटीएफ ओपीडी में 29 लोगों का उपचार चल रहा है। इस में दो युवक जो चिट्ठा, की लत में फंस चुके थे, दवा भी जारी रखे हुए है। वहीं अब वह रोजगार भी कर रहे हैं। काल्पनिक नाम नितिन का कहना है कि उन के एक दोस्त जिस के पिता का अच्छा कारोबार है ने मुझे नशे की लत में फंसाया था। उन के अनुसार एक दिन उन का दोस्त आया उस के पास चिट्ठा था उस ने मुझे बताया कि इस का बहुत मजा आता है, एक बार चखकर देखो मैंने काफी मना किया बार-बार मजबूर करने पर मैंने चिट्ठा की खुराक ले ली वह मस्त हो गया। दूसरे दिन फिर मेरा दोस्त आया व दोनों ने बैठकर चिट्ठा का मजा लिया। इसके बाद मुझे आदत लगने लगी। पहले घर से पैसे मांग कर अपना नशा पूरा करने लगा। बाद में घर में रखे पैसे चुराने लगा। एक दिन मुझे कहीं से पैसे नही मिले तो मेरा शरीर दर्द करने लगा, रात को नींद नहीं आई अगले दिन मैंने किसी रिश्ते से उधार मांग कर अपना नशा पूरा किया। जब मेरे परिवार को पता चला तो उन्होंने मुझे जिला अस्पताल एटीएफ ओपीडी में पहुंचाया। वहां पर मैं ने एक माह तक उपचार करवाया, दवा शुरू की तो उसे लगा की वह अब गलत रास्ते पर नहीं जांउगा। मैंने दवा जारी रखी। आज में रोजगार कर रहा हूं। वहीं दवा आज भी जारी रखे हुए हूं।
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नशे की लत में स्कूली छात्र अधिक फंस रहे हैं। धनवान युवक अन्यों को इस दलदल में फंसा रहे हें। उन के पास 15 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक के लोग आ रहे हैं। वहीं 15 से 25 वर्ष की आयु तक नशे के आदी युवकों की मौतें हुई हैं। है। नशा मुक्त अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
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डॉ विजय भारती, एटीएफ केंद्र सांबा।