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सांबा: ड्रोन की सूचना देने पर किसान को मिले तीन लाख रुपये, IB पर पांच साल में पूरा सुरक्षा बांध
Fri, 01 Mar 2024 02:45 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, सांबा
अमर उजाला नेटवर्क, सांबा
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 01 Mar 2024 02:45 PM IST
सार
बीएसएफ के महानिरीक्षक ने कहा कि हम चाहते हैं कि किसान सीमा पर लगाई फेंसिंग के आगे अपनी जमीन की देखभाल करें, क्योंकि बीएसएफ आपकी सुरक्षा के लिए वहां मौजूद है।
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सांबा
- फोटो : संवाद
विस्तार
सांबा जिले की रामगढ़ तहसील के सीमावर्ती गांव नंदपुर के किसान भगवान दास को ड्रोन की सूचना दिए जाने पर बीएसएफ व पुलिस ने तीन लाख रुपये इनाम देकर सम्मानित किया। इस मौके पर डीके बूरा और एसएसपी सांबा विनय शर्मा ने जीरो लाइन के पास चमलियाल गांव में किसान को चेक सौंपा।
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बीएसएफ के महानिरीक्षक ने कहा कि हम चाहते हैं कि किसान सीमा पर लगाई फेंसिंग के आगे अपनी जमीन की देखभाल करें, क्योंकि बीएसएफ आपकी सुरक्षा के लिए वहां मौजूद है। हम आपको सहायता प्रदान करेंगे। यदि भारतीय किसान फसल नहीं लगा पाएंगे, तो बीएसएफ दूसरे पक्ष को भी खेती करने की अनुमति नहीं देगा।
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गृह मंत्रालय ने आईबी पर फेंसिंग के आगे खेतों में काम कर रहे किसानों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक सुरक्षा बांध के निर्माण के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी है। धन की उपलब्धता के आधार पर सुरक्षा बांध अगले चार से पांच वर्षों में पूरा हो जाएगा। सुरक्षा बांध के पूरा होने के बाद किसान दुश्मन से बिना किसी खतरे के अपना काम आसानी से कर सकेंगे।
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एसएसपी शर्मा ने कहा कि पुलिस ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा करने वाले को इनाम देने की घोषणा की थी। भगवान दास को इस साल जनवरी में दुश्मन के ड्रोन की बरामदगी में मदद के लिए 3 लाख रुपये का चेक सौंपा है।
सीमा पर सुरंग का पता लगाने वाले ग्रामीण को 5 लाख रुपये का इनाम भी दिया गया है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा आतंकवादियों, विस्फोटकों और तस्करी की खेप को सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में भेजने के लिए किया जाता है। लोग हमेशा पुलिस व सुरक्षा बलों को जानकारी प्रदान करने में सहायक रहे हैं।
फेंसिंग के आगे जाने के कुछ नियम हैं, जिनका पालन करना चाहिए
बूरा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में लगाई फेंसिंग से आगे जाने के लिए कुछ नियम हैं, जिनका पालन करने की जरूरत है। बीएसएफ जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में सीमाओं पर तैनात है और ये सभी क्षेत्र फेंसिंग से संरक्षित हैं। नियम हर जगह समान हैं।
केंद्र सरकार ने सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है और इन योजनाओं का असर अगले पांच वर्षों में जमीन पर दिखाई देगा। देश की सुरक्षा में सीमावर्ती निवासियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सीमावर्ती लोगों के सहयोग के बिना सीमा पर सुरक्षा अधूरी है। हमें जम्मू क्षेत्र में सीमावर्ती लोगों पर गर्व है जो राष्ट्रवादी हैं।
पंजाब में सीमा पार से नशीली दवाओं की तस्करी बड़ी चुनौती
बूरा ने कहा कि पड़ोसी पंजाब में सीमा पार से नशीली दवाओं की तस्करी एक बड़ी चुनौती है। पंजाब में ड्रोन और अन्य माध्यमों से नशा आ रहा है। जब हमारे अपने लोग ऐसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्थिति से निपटना मुश्किल हो जाता है। जब सीमा पर रहने वाले लोग राष्ट्रवादी होंगे तो सीमा सुरक्षा बलों का पूरा ध्यान सुरक्षा पर रहता है।