श्रीनगर: सज्जाद लोन बोले- केंद्र वादे पूरे करे, इसके लिए हमें बनाना होगा अनुकूल माहौल, महबूबा पर कसा तंज
सज्जाद ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सभी ने अच्छा बोला और मैं सभी को समान अंक दूंगा। आज तक कोई विजेता और हारने वाला नहीं है, यह एक लंबी प्रक्रिया है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि दिल्ली कुछ करे और हमें उनके लिए एक सक्षम वातावरण बनाना होगा और यह केवल बयानबाजी से नहीं किया जा सकता है।
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पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक के बाद नई दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच सुलह का एक चरण शुरू होगा। केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके लिए एक सक्षम वातावरण तैयार करें, ताकि केंद्र अपने वादों को पूरा करे। लोन ने कहा कि प्रत्येक नेता ने बैठक में अपने लोगों को गौरवान्वित किया और जम्मू-कश्मीर के लोगों के पक्ष में बात की।
लोगों का नुकसान हो, ऐसे बयानबाजी से बचें
लोन ने कहा कि अगर वादों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है या इसमें देरी होती है तो जम्मू-कश्मीर के लोगों को नुकसान होगा। भारत चुनावों का देश है, यहां हर छह महीने में चुनाव होते हैं। हम अपनी बयानबाजी से ऐसा माहौल न बनाएं, जिससे प्रदेश के लोगों का नुकसान हो।
कहा कि बैठक की सारी बातें तो वह नहीं बता सकते हैं, लेकिन इतना कह सकते हैं कि हम बैठक का स्वागत करते हैं। यह दो साल से अधिक की उथल-पुथल के बाद आयोजित की गई थी। नेतृत्व की मांग है कि हम हाल के दिनों में किसी एक उज्ज्वल कल के लिए भविष्य की ओर देखें ना कि ऐसी चीज की मांग करें जिससे हम सहमत नहीं हैं।
अधिकार के रूप में अभी दिया जाना चाहिए राज्य का दर्जा
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर लोन ने कहा कि बैठक में साझा की गई इस तरह की समय सीमा याद नहीं, लेकिन अगर मेरे ऊपर छोड़ा जाए तो मैं कहूंगा कि राज्य का दर्जा अभी दिया जाना चाहिए। इसे एक अधिकार के रूप में दिया जाना चाहिए ना कि एक दान के रूप में।
कहा कि कुछ लोग चुनाव के बहिष्कार का आह्वान कर रहे हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह समझना चाहिए कि यह अच्छे लोगों को डराने के लिए एक जाल हो सकता है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की घोषणा पर कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव लड़ती है, तो वह भी लड़ेंगी, क्योंकि वह अपनी पार्टी के अन्य नेताओं की तुलना में अधिक नैतिक नहीं।