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Jammu News: नियमों की धज्जियां उड़कार स्कूली बच्चों को ढो रहे प्राइवेट वैन और ऑटो रिक्शा
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जम्मू। स्कूली बच्चों को सुरक्षित परिवहन देने के दावे और नियम सिर्फ कागजों तक ही समिति हैं। नियमों की धज्जियां कैसे उड़ती हैं, ये हर रोज देखी जा सकती हैं। इसके बावजूद जिम्मेदारों की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। प्राइवेट वैन और ऑटो में बच्चों को ठूंसकर बैठाया जाता है। नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इन छोटे निजी वाहनों के प्रति न तो अभिभावक सतर्क हैं और न ही जिम्मेदार। यही कारण है ये वाहन सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं।
बुधवार को शहर के बठिंडी इलाके में स्कूली बच्चों से भरी प्राइवेट वैन खंभे से जा टकराई। इसमें कुछ बच्चे घायल हुए हैं। इन नियमों के तहत एक वैन में सात बच्चों को बैठाया जा सकता है, लेकिन हादसाग्रस्त वैन में 12 के करीब बच्चे बैठाए गए थे। बुधवार को ही स्कूलों में छुट्टी के समय ऐसी स्थिति देखी गई। किसी वैन में 15 तो किसी में 20 तक बच्चे बैठाए गए थे। यही हाल ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा का भी था। बच्चों को जानवरों की तरह भरा गया था। जिन प्राइवेट वैन में इन बच्चों को ढोया जा रहा है उनमें जरूरी सुरक्षा उपाय तो दूर की बात है। ये वैन आरटीओ में व्यावसायिक वाहन के रूप में भी पंजीकृत नहीं है, जबकि इन वाहनों के चालक एक बच्चे से महीने का 300 से 400 रुपये शुल्क ले रहे हैं। जम्मू आरटीओ में स्कूलों के नाम पर 600 के करीब ही वाहन पंजीकृत हैं। शहर के कुछ निजी स्कूलों के पास तो अपनी परिवहन सुविधा भी नहीं है। प्राइवेट वैन द्वारा नियमों का उल्लंघन करने के बावजूद न तो जिला प्रशासन, स्कूल शिक्षा विभाग और न आरटीओ की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
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कोट
ऐसे प्राइवेट वैन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हम कार्रवाई करते भी हैं, लेकिन अभिभावक ही आगे हैं। कुछ स्कूलों के पास अपनी परिवहन सुविधा भी नहीं है।
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-पंकज भगोत्रा, आरटीओ जम्मू
ये है नियम
स्कूल बस में फर्स्ट एड किट, फायर एग्जीग्विशर, बस या वैन को पीले रंग में पेंट, स्कूल नाम होना जरूरी है
बस या वैन में हाइड्रोलिक डोर, खिड़कियों में बार लगे होना जरूरी
बस व वैन का फिटनेस सर्टिफिकेट होना जरूरी
बस व वैन में ड्राइवर और कंडक्टर को यूनिफॉर्म व आईडी कार्ड पहनना जरूरी
सीसीटीवी कैमरा लगा होना जरूरी
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बुधवार को शहर के बठिंडी इलाके में स्कूली बच्चों से भरी प्राइवेट वैन खंभे से जा टकराई। इसमें कुछ बच्चे घायल हुए हैं। इन नियमों के तहत एक वैन में सात बच्चों को बैठाया जा सकता है, लेकिन हादसाग्रस्त वैन में 12 के करीब बच्चे बैठाए गए थे। बुधवार को ही स्कूलों में छुट्टी के समय ऐसी स्थिति देखी गई। किसी वैन में 15 तो किसी में 20 तक बच्चे बैठाए गए थे। यही हाल ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा का भी था। बच्चों को जानवरों की तरह भरा गया था। जिन प्राइवेट वैन में इन बच्चों को ढोया जा रहा है उनमें जरूरी सुरक्षा उपाय तो दूर की बात है। ये वैन आरटीओ में व्यावसायिक वाहन के रूप में भी पंजीकृत नहीं है, जबकि इन वाहनों के चालक एक बच्चे से महीने का 300 से 400 रुपये शुल्क ले रहे हैं। जम्मू आरटीओ में स्कूलों के नाम पर 600 के करीब ही वाहन पंजीकृत हैं। शहर के कुछ निजी स्कूलों के पास तो अपनी परिवहन सुविधा भी नहीं है। प्राइवेट वैन द्वारा नियमों का उल्लंघन करने के बावजूद न तो जिला प्रशासन, स्कूल शिक्षा विभाग और न आरटीओ की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
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कोट
ऐसे प्राइवेट वैन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हम कार्रवाई करते भी हैं, लेकिन अभिभावक ही आगे हैं। कुछ स्कूलों के पास अपनी परिवहन सुविधा भी नहीं है।
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-पंकज भगोत्रा, आरटीओ जम्मू
ये है नियम
स्कूल बस में फर्स्ट एड किट, फायर एग्जीग्विशर, बस या वैन को पीले रंग में पेंट, स्कूल नाम होना जरूरी है
बस या वैन में हाइड्रोलिक डोर, खिड़कियों में बार लगे होना जरूरी
बस व वैन का फिटनेस सर्टिफिकेट होना जरूरी
बस व वैन में ड्राइवर और कंडक्टर को यूनिफॉर्म व आईडी कार्ड पहनना जरूरी
सीसीटीवी कैमरा लगा होना जरूरी