अमरनाथ भूमि आंदोलन मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाएगा RSS
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रियासत में भाजपा की सरकार बनने के बाद आरएसएस अमरनाथ भूमि आंदोलन मुद्दे पर गठबंधन सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है। आंदोलन के दौरान जिन कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए थे उन्हें हटाने की रविवार को रणनीति तय की जाएगी।
इसके लिए गीता भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्य के सभी मंत्रियों, सांसदों तथा विधायकों को बुलाया गया है। इसके साथ ही संघ से जुड़े सभी आनुषांगिक संगठनों के जम्मू संभाग के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है। बम-बम भोले आंदोलन में 150 से अधिक कार्यकर्ताओं पर मुकदमे हैं।
वर्ष 2008 में 63 दिनों तक चले अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार ने 150 से अधिक कार्यकर्ताओं पर मुकदमे लाद दिए थे।
सांसदों तथा विधायकों को बुलाया गया
पिछले सात साल से मुकदमा झेल रहे कार्यकर्ताओं को विभिन्न प्रकार की परेशानियों से रूबरू होना पड़ रहा है। कई कार्यकर्ता ऐसे भी हैं जिनके बच्चों का पासपोर्ट तक नहीं बन सका जिसकी वजह से वे उच्च शिक्षा के लिए विदेश नहीं जा सके।
कई को रोजगार के सिलसिले में भी विदेश जाने की अनुमति नहीं मिली। संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अब जब रियासत में गठबंधन सरकार में भाजपा साझीदार है तो संघ परिवार ने इन कार्यकर्ताओं से मुकदमे हटाने के लिए दबाव बनाने की रणनीति बनाई है।
संघ परिवार का तर्क है कि जब घाटी में अलगाववादियों तथा अन्य को छूट मिल सकती है तो अमरनाथ भूमि आंदोलन करने वालों के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। रविवार को मंत्रियों तथा सांसदों, विधायकों की मौजूदगी में यह तय किया जाएगा कि किस प्रकार मुकदमों को हटाया जा सकता है।