जम्मू-कश्मीरः रोशनी लाभार्थी छोटे किसानों और गरीबों के लिए राहत की याचिका, 16 दिसंबर को सुनवाई
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने रोशनी अधिनियम के तहत सरकारी जमीन के मालिक बने छोटे किसानों और भूमिहीन लाभार्थियों के लिए हाईकोर्ट से राहत मांगी है। प्रदेश सरकार के विशेष राजस्व सचिव नजीर अहमद ठाकुर के माध्यम से याचिका दायर कर सरकार ने 9 अक्तूबर 2020 के आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। सरकार ने कहा है कि भूमिहीनों व किसानों और भूमाफिया को अलग-अलग नजर से देखने की जरूरत है।
सरकार ने कहा है कि रोशनी अधिनियम की आड़ में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लाभार्थी भी हैं जो जमीन के छोटे से टुकड़े पर खेती कर रहे हैं या फिर घर बनाकर उसी जमीन पर रह रहे हैं।
हाईकोर्ट के आदेश से अनजाने में ये तबका भी प्रभावित होगा। प्रदेश सरकार को ऐसे जरूरतमंद लाभार्थियों के लिए कोई व्यवस्था बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट में याचिका को सुनवाई के लिए 16 दिसंबर को लिस्ट किया गया है।
पुनर्विचार याचिका में सरकार ने कहा है कि रोशनी अधिनियम का लाभ लेने वाले दो अलग-अलग श्रेणी के हैं। एक वर्ग वो है जिसके पास अपनी कोई जमीन नहीं और वह सरकारी जमीन पर खेती कर गुजारा चला रहा है। कुछ लोग एक घर बनाकर उस जमीन पर रह रहे हैं। दूसरा वर्ग वो है जिसने मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया है या फिर किसी न किसी रूप में नियमों का दुरुपयोग कर सरकारी जमीन का व्यावसायिक लाभ हासिल किया है। दोनों श्रेणी के कब्जाधारकों को अलग-अलग नजरिए से देखना होगा। ऐसे में हाईकोर्ट से अनुरोध है कि सरकार को किसानों और जरूरतमंदों के लिए कोई व्यवस्था बनाकर हाईकोर्ट के समक्ष लाने की अनुमति दी जाए।
फीस लेकर तय सीमा तक दी जा सकती है जमीन
सरकार ने कहा है कि भूमिहीन किसान अथवा इकलौता मकान बनाकर रह रहे वर्ग से फीस लेकर एक निर्धारित सीमा तक भूमि पर कब्जे के अधिकार दिए जा सकते हैं। इस सीमा से बाहर या सरकारी जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों को कोई राहत न दी जाए। कोर्ट यदि अनुमति देती है तो सरकार इस तरह की व्यवस्था बना सकती है।
सीबीआई बड़ी मछलियों के केसों की ही करे जांच
पुनर्विचार याचिका में सरकार ने कहा है कि रोशनी घोटाले में बड़ी मछलियों के मामलों को ही सीबीआई जांच के लिए देना चाहिए। एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच कई मामलों में बहुत आगे तक पहुंच चुकी है। यदि सीबीआई इन मामलों को नए सिरे से जांचती है तो इसमें बहुत देरी होगी। ऐसे मामले सीबीआई को न देकर एसीबी को निर्धारित समय में जांच पूरी करने के आदेश दिए जा सकते हैं।
रोशनी एक्ट में दी गई कुल सरकारी जमीन - 6,04,602 कनाल (75575 एकड़)
जम्मू संभाग - 5,71,210 कनाल
कश्मीर संभाग - 33,392 कनाल
वर्ष 2001 में बनाए गए रोशनी एक्ट को तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 28 नवंबर 2018 को रोशनी योजना को निरस्त कर दिया था। वहीं हाईकोर्ट ने 9 अक्तूबर 2020 को इस योजना को असांविधानिक करार देकर पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने एक नवंबर को ढाई लाख एकड़ जमीन के उन मामलों को खारिज कर दिया, जिन्हें मालिकाना हक दिए जाने थे।