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कौन था रियाज नायकू, इस आतंकी के खात्मे के बाद घाटी में क्या-क्या बदलेगा?

Thu, 07 May 2020 11:47 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 07 May 2020 11:47 AM IST
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Riyaz naikoo news updates in hindi who was Riyaz Naikoo hizbul mujahideen
आतंकी रियाज नायकू का खात्मा - फोटो : अमर उजाला

कश्मीर घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन का मुख्य कमांडर रियाज नायकू बुधवार को बेगपोरा में हुई मुठभेड़ के दौरान एक साथी के साथ मारा गया। सुरक्षाबलों ने आतंकी के सफाए के लिए जिस ऑपरेशन को चलाया उसका नाम था जैकबूट। इस ऑपरेशन को सफल बनाने में सेना के सामने कई चुनौतियां थीं। पहली चुनौती ये कि थी नायकू के खात्मे के दौरान किसी भी नागरिक को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो। इसके लिए उन्हें सुरक्षित जगह पर ले जाना था।

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कौन था रियाज नायकू

कभी गणित का शिक्षक रहा रियाज नायकू अपने तेज और शातिर दिमाग से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बन गया। नायकू न सिर्फ आठ साल तक आतंकी वारदातों को अंजाम देते हुए सुरक्षाबलों को गच्चा देता रहा बल्कि उसने कई कश्मीरी युवाओं को बरगला कर आतंकी भी बना दिया।

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अवंतीपोरा में पंजगाम के नायकू मोहल्ले का रहने वाला रियाज बुरहान वानी का बेहद करीबी थी। हिजबुल के लिए बुरहान के बाद नायकू की इस आतंकी तंजीम के लिए पोस्टर ब्वाय बना। बुरहान के मारे जाने पर सब्जार भट को हिजबुल की कमान दी गई लेकिन वर्ष 2017 में त्राल में हुई मुठभेड़ में सब्जार मारा गया। हिजबुल ने सब्जार के मारे जाने पर पुराने और सक्रिय आतंकी अल्ताफ काचरू और सद्दाम पड्डर के बजाय नायकू को हिजबुल की कमान सौंप दी।
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पुलिस के सूत्रों के अनुसार नायकू को कमांडर बनाकर हिजबुल दक्षिणी कश्मीर में जाकिर मूसा के प्रभाव को कम करना चाहता था। सब्जार से पहले जाकिर मूसा को हिजबुल का कमांडर बनाया गया था। लेकिन कुछ समय बाद वह कट्टरवादी विचारधारा को बढ़ावा देने की बात करने लगा जिसके कारण मूसा का प्रभाव कश्मीर में बढ़ रहा था। इसी के चलते मूसा ने हिजबुल से अलग होकर 2017 में अल कायदा के समर्थन वाले गजवातुल हिंद संगठन की शुरुआत की। मूसा 23 मई 2019 को त्राल में एक मुठभेड़ के दौरान मारा गया।

नायकू ने आतंकियों के जनाजों में गन सैल्यूट का चलन दोबारा शुरू कराया

युवाओं को आतंक के रास्ते ले जाने और आतंकी साजिशें रचने के लिए कुख्यात नायकू ने घाटी में आतंकियों के जनाजों में गन सैल्यूट का चलन दोबारा शुरू कराया। वह कॉम्बेट ड्रेस पहने आतंकी के जनाजे में पहुंचता और हवाई फायरिंग कर जनाजे में शामिल युवाओं को आतंकी बनने के लिए उकसाता था।

नायकू सबसे पहले जनवरी 2016 में आतंकी शरीक अहमद भट के जनाजे में नजर आया। इसके बाद आतंकी के जनाजों में गन सैल्यूट और नए युवाओं की भर्ती का चलन शुरू हो गया। यही नहीं, नायकू ने वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के कई परिवार वालों को अगवा कर लिया। इसके कई वीडियो वायरल हुए। नायकू ने अगवा लोगों को छोड़ने के लिए अपने पिता की पुलिस से रिहाई करवाई। इसके बाद नायकू ने स्थानीय निकाय चुनाव में भाग लेने वालों को भी एसिड हमले की चेतावनी दी।

आईएस की तरह बना निर्मम हत्यारा
घाटी में किसी स्थानीय नागरिक की निर्मम हत्या करने वाले नायकू ने आईएस का तौर तरीका अपनाया। 15 नवंबर 2018 में 18 वर्षीय युवक की अगवा करने के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई। नायकू ने वीडियो वायरल कर हत्या की जिम्मेदारी ली और मुखबिरी करने वालों को बेरहमी से कत्ल की चेतावनी जारी की।

नायकू के ढेर होने से कश्मीर में हिजबुल की कमर टूट गई

नायकू के ढेर होने से कश्मीर में हिजबुल की कमर टूट गई है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आतंकियों की रैकिंग में नायकू को ए प्लस प्लस श्रेणी (सबसे ऊपर) में रखा गया था। मोस्ट वांटेड की सूची में सबसे पहला नाम नायकू का था जिस पर 12 लाख रुपये का इनाम भी रखा गया था।

नायकू के मारे जाने से अब हिजबुल के साथ दूसरे आतंकी संगठनों का हौसला भी पस्त होना लाजमी है। बताया जा रहा है कि नई भर्ती से लेकर आतंकी ठिकाने बनाने और हमले को अंजाम देने की साजिश रचने में नायकू को माहिर माना जाता था।

नायकू के खात्मे के मायने

  • कश्मीर के स्थानीय युवाओं के हिजबुल से जुड़ने पर लगेगा विराम
  • आतंकी साजिशों की प्लानिंग रुकेगी
  • हिजबुल के आतंकियों को कमान देने वाला कोई नहीं रहा
  • बचे आतंकियों का मनोबल टूटेगा


100 से अधिक युवाओं को जोड़ चुका था
हिजबुल मुजाहिदीन के लिए कश्मीर के स्थानीय युवाओं की भर्ती करने का जिम्मा रियाज नायकू पर ही था। नायकू कश्मीर के 100 से अधिक स्थानीय युवाओं को अपने साथ जोड़ चुका था। वह अभी भी कश्मीरी युवाओं को बरगलाकर अपने साथ जोड़ रहा था।

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