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आधार खो रहे राजनीतिक दल, गणतंत्र दिवस समारोह को सांप्रदायिक रंग देने की कर रहे कोशिश: मलिक
Wed, 23 Jan 2019 10:38 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 23 Jan 2019 10:38 AM IST
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सार
- समाज को बांटने की राजनीति ने कश्मीर को किया बर्बाद
- 26 जनवरी के संबंध में आदेश का राजनीतिकरण हो रहा: राज्यपाल
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक
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विस्तार
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने सरकारी कर्मचारियों के लिए गणतंत्र दिवस समारोह में सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने को अनिवार्य करने के आदेश का राजनीतिकरण करने का राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया है। कहा कि वे अब लगभग निष्क्रिय हो चुके हैं। साथ ही अपना आधार खो रहे हैं। इस वजह से इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी आड़ में वे वोट की खातिर समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह की राजनीति ने ही कश्मीर को बर्बाद कर दिया। अपील की कि कृपया इस तरह के कार्य न करें। यह अच्छा नहीं है।उन्होंने कहा कि वह 2009 से जारी किए जा रहे इस आदेश का समर्थन करते हैं। यह नया आदेश नहीं है। यह 2009 से जारी हो रहा है। यह मुझसे पहले से जारी होता रहा है। हर साल एक जैसा आदेश जारी होता है। अल्प विराम या पूर्ण विराम बदले बिना। मेरे पास 2009 से 2018 तक के आदेश मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
यह उनकी ड्यूटी है और उन्हें उस दिन मौजूद रहना चाहिए। इसमें राष्ट्रवाद थोपने जैसा कुछ भी नहीं है। इसमें राष्ट्रवाद कहां से आ गया। उन्हें अपना रूटीन का काम करना है। राज्य प्रशासन द्वारा 15 जनवरी को जारी आदेश के अनुसार, कर्मचारियों को चेताया गया कि समारोह में शामिल नहीं होने पर ड्यूटी में लापरवाही माना जाएगा।
दरअसल, पीडीपी नेता वहीद पारा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों में शामिल होने की इच्छा होनी चाहिए, जबरन आदेश नहीं दिया जाना चाहिए। यह स्पष्ट रूप से बताता है कि अभिन्न हिस्से में चीजें कैसे होती हैं और कैसे हो रही हैं। देशभक्तिथोपी नहीं जा सकती, यह अंदर से आनी चाहिए। निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने इस आदेश को असंवैधानिक करार दिया था।