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आर्मी के मूक योद्घाओं का जवाब नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 14 Dec 2015 05:40 PM IST
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भारतीय सेना की पुरानी सर्विसों में से एक द रिमाउंट वैटेरीनरी कॉपर्स(आरवीसी) ने आज उत्तरी कमांड के हैडक्वार्टर में अपना 237वां स्थापना दिवस मनाया। आवीसी आर्मी कुत्तों को पालने, प्रजनन और ट्रेनिंग देने की प्रमुख एजेंसी है।
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अधिकारी ने बताया कि उत्तरी कमांड में ये कुत्ते रखवाली, ट्रैकिंग, सुरंगों का पता लगाने , विस्फोटकों का पता लगाने , खोज और बचाव और हिमस्खलन - बचाव और पैदल सेना गश्त के कार्य के लिए तैनाती में काम आते हैं।
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आर्मी के कुत्ते एक पक्के मूक योद्घा हैं। जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक मुख्य यौद्घा आरवीसी और भारतीय सेना के लिए साबित होते हैं।
आर्मी कुत्तों और इन्हें संभालने वालों के बेहतरीन काम करने के लिए उत्तरी कमांड की आठ यूनिट को आर्मी चीफ, आर्मी कमांडर और गवर्नर ने सम्मानित हो चुकी हैं।
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अब तक आवीसी में दो सेना मेडल, 83 चीफ कमांडेशन काडर्स, दो वाइस चीफ कमांडेशन काडर्स और 284 आर्मी कमांडर कमांडेशन काडर्स से उनके कुत्ते और इनको संभालने वाले सम्मानित हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सेना के जानवरों को अच्छी सेहत और फिटनेस बनाए रखना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन इसके लिए उत्तरी कमांड में कई ऐसे आर्मी हॉस्पिटल हैं जहां पर इन्हें बेहद अच्छी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
ये हॉस्पिटल सदभावना ऑपरेशन के तहत ऐड कैंप, ट्रेनिंग कोर्स, पब्लिक जानवरों को मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध कराने जैसे योगदानों के लिए कई लोगों का दिल जीत चुके हैं।