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Jammu News: घाटी में धूमधाम से मनाई महाशिवरात्रि शंकराचार्य मंदिर में विशेष हवन-पूजन
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श्री शंकराचार्य मंदिर में माथा टेकने पहुंचे श्रद्धालु।
- बारिश के बीच कश्मीरी पंडितों संग पर्यटकों ने किए भोलेनाथ के दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में धार्मिक सद्भाव के साथ बुधवार को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता देखने को मिला। श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को सजाया गया था। कश्मीर पंडितों के साथ पर्यटकों ने भी विशेष पूजा में भाग लिया।
डल झील के किनारे जबरवान पहाड़ी पर स्थित शंकराचार्य मंदिर में सुबह से बारिश के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने शिवलिंग पर दूध, फूल आदि चड़ाकर प्रार्थना की। तड़के करीब तीन बजे विशेष हवन शुरू हुआ, जिसमें कश्मीरी पंडितों के अलावा पर्यटकों व सुरक्षाकर्मियों ने आहुतियां डालीं। मंदिर के पुजारी विधु शर्मा ने कहा, महाशिवरात्रि सनातन धर्म का बड़ा पर्व है। 144 वर्ष बाद आज ऐसा दिन आया है, क्योंकि महाकुंभ में भी आखिरी स्नान है। आज के दिन बारिश और बर्फबारी को शुभ माना जाता है। प्रातः तीन बजे सबसे पहले रुद्राभिषेक कर हवन किया।
श्री शंकराचार्य मंदिर में जम्मू से आए शास्त्री राकेश रैना ने कहा हम हर वर्ष यहां पूजा करने आते हैं। आज का दिन भी अच्छा रहा। सुबह हमने रुद्राभिषेक भी किया। हम भोलेनाथ से प्रार्थना करते हैं कि अमन-शांति का माहौल रहे और सब लोग भाईचारे से रहें। उन्होंने कहा कि कश्मीर की विशेष संस्कृति को देख काफी अच्छा लगा।
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श्रीनगर के अलावा गांदरबल जिले के खीर भवानी तुलमुला मंदिर में भी कश्मीरी पंडितों ने महाशिवरात्रि का पर्व मनाया। अनंतनाग के मट्टन इलाके में स्थित मार्तंड मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माथा टेका। इसके अलावा सेना, सीआरपीएफ़, बीएसएफ़ के कैंपों में भी रौनक देखने को मिली। जवानों ने अपने-अपने यूनिटों में विशेष पूजा की। लंगर भी लगाए गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में धार्मिक सद्भाव के साथ बुधवार को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता देखने को मिला। श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को सजाया गया था। कश्मीर पंडितों के साथ पर्यटकों ने भी विशेष पूजा में भाग लिया।
डल झील के किनारे जबरवान पहाड़ी पर स्थित शंकराचार्य मंदिर में सुबह से बारिश के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने शिवलिंग पर दूध, फूल आदि चड़ाकर प्रार्थना की। तड़के करीब तीन बजे विशेष हवन शुरू हुआ, जिसमें कश्मीरी पंडितों के अलावा पर्यटकों व सुरक्षाकर्मियों ने आहुतियां डालीं। मंदिर के पुजारी विधु शर्मा ने कहा, महाशिवरात्रि सनातन धर्म का बड़ा पर्व है। 144 वर्ष बाद आज ऐसा दिन आया है, क्योंकि महाकुंभ में भी आखिरी स्नान है। आज के दिन बारिश और बर्फबारी को शुभ माना जाता है। प्रातः तीन बजे सबसे पहले रुद्राभिषेक कर हवन किया।
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श्री शंकराचार्य मंदिर में जम्मू से आए शास्त्री राकेश रैना ने कहा हम हर वर्ष यहां पूजा करने आते हैं। आज का दिन भी अच्छा रहा। सुबह हमने रुद्राभिषेक भी किया। हम भोलेनाथ से प्रार्थना करते हैं कि अमन-शांति का माहौल रहे और सब लोग भाईचारे से रहें। उन्होंने कहा कि कश्मीर की विशेष संस्कृति को देख काफी अच्छा लगा।
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श्रीनगर के अलावा गांदरबल जिले के खीर भवानी तुलमुला मंदिर में भी कश्मीरी पंडितों ने महाशिवरात्रि का पर्व मनाया। अनंतनाग के मट्टन इलाके में स्थित मार्तंड मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माथा टेका। इसके अलावा सेना, सीआरपीएफ़, बीएसएफ़ के कैंपों में भी रौनक देखने को मिली। जवानों ने अपने-अपने यूनिटों में विशेष पूजा की। लंगर भी लगाए गए।