{"_id":"696bf444d536292e600670d0","slug":"religious-news-samba-news-c-268-1-akb1001-101627-2026-01-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रभु भक्ति से मिलती है सकारात्मक दिशा : ज्योत्सना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रभु भक्ति से मिलती है सकारात्मक दिशा : ज्योत्सना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्री हरि कथा में साध्वी ने श्रद्धालुओं को भक्ति का महत्व बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में रामा पैलेस अखनूर में श्री हरि कथा में शनिवार चाैथे दिन साध्वी ज्योत्सना भारती ने प्रभु भक्ति का महत्व बताया। कथावाचक ने संगत को बताया कि आज मानव नकारात्मक विचारों से घिरा हुआ है। नकारात्मकता के कारण मानव जीवन पतन की गहराइयों की ओर जा रहा है। नशे की दलदल में फंसकर मानव अपने कर्तव्यों से विमुख हो रहा है। यदि वह ईश्वर की ओर कदम बढ़ाता है तो सकारात्मक विचारों के परिवेश में उसका दृष्टिकोण स्वतः ही बदल जाता है। उन्नति की बुलंदियों को छू सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि मानव अपना दृष्टिकोण बदले जो केवल श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु की शरणागति होकर ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने से ही संभव है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही मानव अपने घट में भगवान के दर्शन कर सकता है।
साध्वी ने बताया कि जहां सांसारिक नशा मानव जीवन को विनाश की ओर ले जाता है। प्रभु भक्ति का नशा जीवन को सफल, सुखी, सार्थक एवं प्रतिष्ठित बनाता है। अतः सभी भ्रमों को त्याग कर जीवन में प्रभु भक्ति को अपनाना चाहिए और पूर्ण सतगुरु की शरण में जाकर ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर आत्म उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होना ही विवेकशीलता है। कार्यक्रम का समापन श्री आरती के साथ किया गया। इसके बाद भंडारा लगाया गया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में रामा पैलेस अखनूर में श्री हरि कथा में शनिवार चाैथे दिन साध्वी ज्योत्सना भारती ने प्रभु भक्ति का महत्व बताया। कथावाचक ने संगत को बताया कि आज मानव नकारात्मक विचारों से घिरा हुआ है। नकारात्मकता के कारण मानव जीवन पतन की गहराइयों की ओर जा रहा है। नशे की दलदल में फंसकर मानव अपने कर्तव्यों से विमुख हो रहा है। यदि वह ईश्वर की ओर कदम बढ़ाता है तो सकारात्मक विचारों के परिवेश में उसका दृष्टिकोण स्वतः ही बदल जाता है। उन्नति की बुलंदियों को छू सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि मानव अपना दृष्टिकोण बदले जो केवल श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु की शरणागति होकर ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने से ही संभव है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही मानव अपने घट में भगवान के दर्शन कर सकता है।
साध्वी ने बताया कि जहां सांसारिक नशा मानव जीवन को विनाश की ओर ले जाता है। प्रभु भक्ति का नशा जीवन को सफल, सुखी, सार्थक एवं प्रतिष्ठित बनाता है। अतः सभी भ्रमों को त्याग कर जीवन में प्रभु भक्ति को अपनाना चाहिए और पूर्ण सतगुरु की शरण में जाकर ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर आत्म उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होना ही विवेकशीलता है। कार्यक्रम का समापन श्री आरती के साथ किया गया। इसके बाद भंडारा लगाया गया।
विज्ञापन