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Jammu News: लाल चौक पर रामजी की निकली सवारी... रामजी की लीला है न्यारी...
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- श्रीनगर में रामनवमी पर कश्मीरी पंडितों ने शोभायात्रा निकल किया प्रभु की महिमा का गुणगान
- सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर थे जवान
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में अब सुखद बदलाव की बयार बह रही। जिस कश्मीर में भीड़ हुड़दंग और पत्थरबाजी के लिए जुटती थी, अब अमन-शांति का पैगाम देती है, जो लाल चौक गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजता था, अब यहां खुशियों के गीत गाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बुधवार को रामनवमी पर कश्मीरी पंडितों ने लाल चौक से श्रीनगर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली। इसमें मुस्लिम भाइयों ने भी शिरकत कर एकता और भाइचारे का संदेश दिया।
कड़ी सुरक्षा के बीच निकाली गई शोभायात्रा में फूलों से सजे रथ पर सवार श्रीराम, सीता माता, लक्ष्मण और हनुमान की वेशभूषा में बच्चों ने सबका मन मोह लिया। भक्तों ने नाचते-गाते प्रभु श्रीराम की महिमा का गुणगान किया। शोभायात्रा श्रीनगर के हब्बाकदल में स्थित कत्लेश्वर मंदिर से निकली और समंदरबाग, रेजीडेंसी रोड से होते हुए लाल चौक से गुजरते हुए जहांगीर चौक फिर वापस हब्बाकदल पहुंची। शोभायात्रा में भक्ति संगीत पर कश्मीरी रिवायती भजन भी गाए। हाथों में ढोलक और घंटियां लिए भक्तों ने भजन कीर्तन कर शोभायात्रा की शोभा और बढ़ा दी। शोभायात्रा में शामिल भारद्वाज ने कहा, रामनवमी पर नौ देवियों की पूजा की जाती है। पिछले दिनों रोजे थे और ईद का पर्व धूमधाम से मनाया गया। आज रामनवमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जिस तरह से कश्मीर में हिंदुओं ने मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर ईद मनाई आज, उसी तरह इस धार्मिक कार्यक्रम में मुस्लिम भाइयों का सहयोग मिला। हम यही प्रार्थना करते हैं कि कश्मीर में यह भाईचारा कायम रहे और घाटी का कल्याण हो। यहां अमन-शांति बनी रहे। जब यहां श्री अमरनाथ यात्रा होती है तो कश्मीर में भाईचारे की मिसाल देखने को मिलती है। सभी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग देते हैं। एक स्थानीय मुस्लिम ने कहा कि कश्मीर में हमेशा से धर्मनिरपेक्षता रही है। लेकिन कुछ शरारतीतत्वों के कारण पूरा कश्मीर बदनाम हो जाता है। आज हम सब यह कहना चाहते हैं कि हम सब एक हैं और पहले हम कश्मीरी हैं फिर हिंदू, मुस्लिम, सिख या इसाई हैं।
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शंकराचार्य मंदिर के साथ कुपवाड़ा के
भद्रकाली मंदिर में भी उमड़े भक्त
श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में भी इस अवसर पर भक्तों की भीड़ उमड़ी और विशेष पूजा में भाग लिया। भक्तों के लिए यहां भंडारा भी लगाया गया। उधर, कुपवाड़ा जिले के भद्रकाली मंदिर में भी रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीराम की पूजा करने के लिए भद्रकाली मंदिर में पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू दर्शन की सुविधा प्रदान करने मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों के जवान तैनात थे। इसके अलावा हंदवाड़ा में शैलपुत्री मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया था। भक्त सुबह से ही मंदिर में माथा टेकने के लिए पहुंच गए थे। मंदिर में भजन कीर्तन में भक्तो के साथ सैन्य जवानों ने भी हिस्सा लिया।
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- सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर थे जवान
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में अब सुखद बदलाव की बयार बह रही। जिस कश्मीर में भीड़ हुड़दंग और पत्थरबाजी के लिए जुटती थी, अब अमन-शांति का पैगाम देती है, जो लाल चौक गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजता था, अब यहां खुशियों के गीत गाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बुधवार को रामनवमी पर कश्मीरी पंडितों ने लाल चौक से श्रीनगर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली। इसमें मुस्लिम भाइयों ने भी शिरकत कर एकता और भाइचारे का संदेश दिया।
कड़ी सुरक्षा के बीच निकाली गई शोभायात्रा में फूलों से सजे रथ पर सवार श्रीराम, सीता माता, लक्ष्मण और हनुमान की वेशभूषा में बच्चों ने सबका मन मोह लिया। भक्तों ने नाचते-गाते प्रभु श्रीराम की महिमा का गुणगान किया। शोभायात्रा श्रीनगर के हब्बाकदल में स्थित कत्लेश्वर मंदिर से निकली और समंदरबाग, रेजीडेंसी रोड से होते हुए लाल चौक से गुजरते हुए जहांगीर चौक फिर वापस हब्बाकदल पहुंची। शोभायात्रा में भक्ति संगीत पर कश्मीरी रिवायती भजन भी गाए। हाथों में ढोलक और घंटियां लिए भक्तों ने भजन कीर्तन कर शोभायात्रा की शोभा और बढ़ा दी। शोभायात्रा में शामिल भारद्वाज ने कहा, रामनवमी पर नौ देवियों की पूजा की जाती है। पिछले दिनों रोजे थे और ईद का पर्व धूमधाम से मनाया गया। आज रामनवमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जिस तरह से कश्मीर में हिंदुओं ने मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर ईद मनाई आज, उसी तरह इस धार्मिक कार्यक्रम में मुस्लिम भाइयों का सहयोग मिला। हम यही प्रार्थना करते हैं कि कश्मीर में यह भाईचारा कायम रहे और घाटी का कल्याण हो। यहां अमन-शांति बनी रहे। जब यहां श्री अमरनाथ यात्रा होती है तो कश्मीर में भाईचारे की मिसाल देखने को मिलती है। सभी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग देते हैं। एक स्थानीय मुस्लिम ने कहा कि कश्मीर में हमेशा से धर्मनिरपेक्षता रही है। लेकिन कुछ शरारतीतत्वों के कारण पूरा कश्मीर बदनाम हो जाता है। आज हम सब यह कहना चाहते हैं कि हम सब एक हैं और पहले हम कश्मीरी हैं फिर हिंदू, मुस्लिम, सिख या इसाई हैं।
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शंकराचार्य मंदिर के साथ कुपवाड़ा के
भद्रकाली मंदिर में भी उमड़े भक्त
श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में भी इस अवसर पर भक्तों की भीड़ उमड़ी और विशेष पूजा में भाग लिया। भक्तों के लिए यहां भंडारा भी लगाया गया। उधर, कुपवाड़ा जिले के भद्रकाली मंदिर में भी रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीराम की पूजा करने के लिए भद्रकाली मंदिर में पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू दर्शन की सुविधा प्रदान करने मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों के जवान तैनात थे। इसके अलावा हंदवाड़ा में शैलपुत्री मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया था। भक्त सुबह से ही मंदिर में माथा टेकने के लिए पहुंच गए थे। मंदिर में भजन कीर्तन में भक्तो के साथ सैन्य जवानों ने भी हिस्सा लिया।
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