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Jammu News: चिनैनी में दशहरे पर रावण का न वध होता है, न दहन
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- तीन दशक पहले हुई घटना के बाद से पंद्रह दिवसीय रामलीला के आखिर में पूर्णिमा पर होता है अंत
- स्थानीय लोग दशहरे पर रावण वध को नहीं मानते सही
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। चिनैनी की रामलीला ऐतिहासिक होने के साथ-साथ थोड़ी अलग भी है। यहां पंद्रह दिनों तक होने वाली रामलीला में रावण का वध नहीं किया जाता। न ही उसका पुतला जलाया जाता है। यहां रावण का अंत पूर्णिमा पर होता है।
रामलीला कमेटी के सदस्यों के अनुसार, दशहरे पर चिनैनी में रावण का पुतला इसलिए नहीं जलाया जाता, क्योंकि तीन दशक पहले दशहरा मनाने के दौरान एक घटना घट गई थी। तब आतिशबाजी के दौरान राम का किरदार निभाने वाले कलाकार की आंख में पटाखा लग गया था। इसके बाद से चिनैनी में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। स्थानीय लोगों का मानना है कि रावण प्रतापी राजा था और अनुष्ठान में विश्वास रखता था। इस कारण दशहरे पर उसका वध सही नहीं मानते हैं। रामलीला कमेटी के सदस्यों का कहना है कि यहां पंद्रह दिनों तक रामलीला का मंचन किया जाता है। इस बीच में रावण का वध करने से रामलीला की प्रस्तुतियों पर असर पड़ता है। इस कारण पूर्णिमा पर उसका अंत होता है।
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- स्थानीय लोग दशहरे पर रावण वध को नहीं मानते सही
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। चिनैनी की रामलीला ऐतिहासिक होने के साथ-साथ थोड़ी अलग भी है। यहां पंद्रह दिनों तक होने वाली रामलीला में रावण का वध नहीं किया जाता। न ही उसका पुतला जलाया जाता है। यहां रावण का अंत पूर्णिमा पर होता है।
रामलीला कमेटी के सदस्यों के अनुसार, दशहरे पर चिनैनी में रावण का पुतला इसलिए नहीं जलाया जाता, क्योंकि तीन दशक पहले दशहरा मनाने के दौरान एक घटना घट गई थी। तब आतिशबाजी के दौरान राम का किरदार निभाने वाले कलाकार की आंख में पटाखा लग गया था। इसके बाद से चिनैनी में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। स्थानीय लोगों का मानना है कि रावण प्रतापी राजा था और अनुष्ठान में विश्वास रखता था। इस कारण दशहरे पर उसका वध सही नहीं मानते हैं। रामलीला कमेटी के सदस्यों का कहना है कि यहां पंद्रह दिनों तक रामलीला का मंचन किया जाता है। इस बीच में रावण का वध करने से रामलीला की प्रस्तुतियों पर असर पड़ता है। इस कारण पूर्णिमा पर उसका अंत होता है।
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