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Jammu News: पांच दशक बाद पुलवामा में कश्मीरी पंडितों ने किया हवन
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- मुरन के बरारी मौज मंदिर में जुटे पंडित समुदाय के लोग
- मुस्लिम भाइयों ने किया स्वागत, पूजा में की मदद
- विस्थापन के बाद पहली बार हो रहा है हवन पूजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में स्थित मुरन के बरारी मौज मंदिर में पांच दशक बाद कश्मीरी पंडितों ने हवन पूजन किया। इस धार्मिक कार्यक्रम में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां के लोगों के मुताबिक, हम काफी खुश हैं, क्योंकि अरसे बाद आज कश्मीरी पंडित अपने घर पहुंचे और मंदिर में पूजा की है।
पूजा में शामिल कश्मीरी पंडितों ने कहा कि यहां आकर बहुत खुशी हुई है, क्योंकि जब हम यहां से गए थे तब से लेकर आज तक कभी इस मंदिर में पूजा नहीं की। मंगलवार को मंदिर घंटियों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। मुस्लिम समुदाय के लोग भी काफी ज्यादा खुश नजर आ आए, जब मंदिर में कश्मीरी पंडित पूजा करने पहुंचे तो उनका मुस्लिम भाइयों ने भव्य स्वागत किया और हवन पूजन में मदद की। कश्मीरी पंडितों ने 50 साल बाद मुरन के बरारी मौज मंदिर में हवन और विशेष प्रार्थना की। अशांति के कारण घाटी छोड़ने वाले देश के विभिन्न हिस्सों से कश्मीरी पंडित लंबे अंतराल के बाद घाटी में लौटे हैं। इस बीच कश्मीरी पंडितों ने बताया कि घाटी में भाईचारा वैसा ही बना हुआ है जैसा 50 साल पहले था।
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- मुस्लिम भाइयों ने किया स्वागत, पूजा में की मदद
- विस्थापन के बाद पहली बार हो रहा है हवन पूजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में स्थित मुरन के बरारी मौज मंदिर में पांच दशक बाद कश्मीरी पंडितों ने हवन पूजन किया। इस धार्मिक कार्यक्रम में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां के लोगों के मुताबिक, हम काफी खुश हैं, क्योंकि अरसे बाद आज कश्मीरी पंडित अपने घर पहुंचे और मंदिर में पूजा की है।
पूजा में शामिल कश्मीरी पंडितों ने कहा कि यहां आकर बहुत खुशी हुई है, क्योंकि जब हम यहां से गए थे तब से लेकर आज तक कभी इस मंदिर में पूजा नहीं की। मंगलवार को मंदिर घंटियों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। मुस्लिम समुदाय के लोग भी काफी ज्यादा खुश नजर आ आए, जब मंदिर में कश्मीरी पंडित पूजा करने पहुंचे तो उनका मुस्लिम भाइयों ने भव्य स्वागत किया और हवन पूजन में मदद की। कश्मीरी पंडितों ने 50 साल बाद मुरन के बरारी मौज मंदिर में हवन और विशेष प्रार्थना की। अशांति के कारण घाटी छोड़ने वाले देश के विभिन्न हिस्सों से कश्मीरी पंडित लंबे अंतराल के बाद घाटी में लौटे हैं। इस बीच कश्मीरी पंडितों ने बताया कि घाटी में भाईचारा वैसा ही बना हुआ है जैसा 50 साल पहले था।
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