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मीनिया बिरादरी ने बाबा बिरफा नाथ के दर पर माथा टेक लिया आशीर्वाद
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जम्मू। आरएस पुरा के कलाली टिब्बा क्षेत्र में मंगलवार को मीनिया बिरादरी की वार्षिक मेल धूमधाम से मनाई गई। बड़ी संख्या में बिरादरी के लोगों ने कुल देवता बिरफा नाथ के स्थान पर माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस बार देर शाम तक भक्त माथा टेकने के लिए देवस्थान पर पहुंचते रहे। पंजाब, हरियाणा, और दिल्ली से भी लोग सोमवार शाम यहां पहुंच गए थे। सुबह सबसे पहले बाबाजी के नाम का ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद हवन करवाया। बाबा के चेलों ने उनके नाम की यात्रा भी की। दोपहर बाद विशाल रोट को आग से निकाला गया। यह रोट विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। जिसे कम से कम पांच घंटे तक आग के भीतर दबाकर रखा जाता है। इसके बाद इसे बाहर निकालकर बाबा के दरबार में रखा जाता है और संगत में प्रसाद के रूप में लंगर के साथ दिया जाता है। वहीं, कई लोग ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे। बड़ी संख्या में ट्रस्ट के पास लोगों ने दान किया है।
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नए जोड़ों की शादी फेरों के बिना अधूरी
मेल में सैकड़ों नए शादीशुदा जोड़ों ने बाबा के मंदिर के फेरे लिए। मान्यता है कि मीनिया बिरादरी के किसी भी युवक की शादी होने के बाद उसको अपनी पत्नी के साथ बाबा के मंदिर के फेरे लेने पड़ते हैं। तभी शादी पूरी होती है। पंजाब, जम्मू, दिल्ली और हरियाणा से कई नए विवाहित जोड़े विशेष तौर पर फेरे लेने के लिए देवस्थान पर पहुंचे। मान्यता है कि बिरादरी में किसी भी युवक के जन्म लेने और उसकी शादी होने के बाद बाबा के दरबार में बकरा चढ़ाया जाता है। लिहाजा कई लोगों ने बाबा के दरबार में बकरे चढ़ाकर अपनी मन्नतें पूरी कीं। बकरे चढ़ाने के लिए विशेष तौर पर प्रार्थना की जाती है।
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मेले के साथ खेलों का आयोजन
मेल में इस बार संगत के लिए मेले का भी आयोजन किया गया। खेलों का भी आयोजन किया गया, जिसमें विशेष तौर पर बच्चों ने हिस्सा लिया। लोगों ने अपनी मन्नतें पूरी होने को लेकर मेले में स्टाल लगाए। राज रानी ने बताया कि पिछले साल कोरोना के चलते नहीं पहुंच पाए थे। इस साल बाबा के दरबार में पहुंचकर खुशी हो रही है। सुदेश कुमारी ने बताया कि वे लोग छन्नी क्षेत्र से आए हैं और यहां आकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया है।
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नए जोड़ों की शादी फेरों के बिना अधूरी
मेल में सैकड़ों नए शादीशुदा जोड़ों ने बाबा के मंदिर के फेरे लिए। मान्यता है कि मीनिया बिरादरी के किसी भी युवक की शादी होने के बाद उसको अपनी पत्नी के साथ बाबा के मंदिर के फेरे लेने पड़ते हैं। तभी शादी पूरी होती है। पंजाब, जम्मू, दिल्ली और हरियाणा से कई नए विवाहित जोड़े विशेष तौर पर फेरे लेने के लिए देवस्थान पर पहुंचे। मान्यता है कि बिरादरी में किसी भी युवक के जन्म लेने और उसकी शादी होने के बाद बाबा के दरबार में बकरा चढ़ाया जाता है। लिहाजा कई लोगों ने बाबा के दरबार में बकरे चढ़ाकर अपनी मन्नतें पूरी कीं। बकरे चढ़ाने के लिए विशेष तौर पर प्रार्थना की जाती है।
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मेले के साथ खेलों का आयोजन
मेल में इस बार संगत के लिए मेले का भी आयोजन किया गया। खेलों का भी आयोजन किया गया, जिसमें विशेष तौर पर बच्चों ने हिस्सा लिया। लोगों ने अपनी मन्नतें पूरी होने को लेकर मेले में स्टाल लगाए। राज रानी ने बताया कि पिछले साल कोरोना के चलते नहीं पहुंच पाए थे। इस साल बाबा के दरबार में पहुंचकर खुशी हो रही है। सुदेश कुमारी ने बताया कि वे लोग छन्नी क्षेत्र से आए हैं और यहां आकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया है।
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