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Jammu News: बाड़ी ब्राह्मणा के उद्योगों पर संकट सरकार से राहत पैकेज की मांग

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Relief package sought for industries
तरुण सिंघला - फोटो : Samvad
- 750 औद्योगिक इकाइयों के सामने अस्तित्व का संकट, कई बंद, कई बंद होने की कगार पर
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- जिप्सम, बिजली और एनओसी की समस्याएं दूर करने की मांग





संवाद न्यूज एजेंसी

बाड़ी ब्राह्मणा। औद्योगिक क्षेत्र की 750 इकाइयों पर संकट गहराने का दावा करते हुए बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि समय रहते मदद नहीं मिली तो कई और इकाइयां बंद हो सकती हैं। एसोसिएशन ने मौजूदा उद्योगों के लिए आर्थिक सहायता, स्थानीय स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध कराने, बिजली व्यवस्था सुधारने और एनओसी की प्रक्रिया आसान बनाने की मांग उठाई है।

प्रधान तरुण सिंघला ने कहा कि कई औद्योगिक इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि कई अन्य मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। सरकार नई इकाइयों को जिस तरह की सब्सिडी और प्रोत्साहन देती है, उसी तर्ज पर पहले से चल रहे उद्योगों को भी कम से कम 20 प्रतिशत सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे कारोबार जारी रख सकें और रोजगार बचा रहे। सिंघला का दावा है कि बाड़ी ब्राह्मणा की औद्योगिक उत्पादन शृंखला करीब 40 हजार करोड़ रुपये की है। इसे बचाने के लिए सरकार का सहयोग जरूरी है और इससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। उन्होंने सरकार से उद्योग संगठनों के साथ जल्द बैठक करने, राहत पैकेज पर फैसला लेने, बिजली और लॉजिस्टिक सुविधाएं बेहतर करने तथा स्थानीय उद्योगों को कच्चा माल प्राथमिकता से उपलब्ध कराने की मांग की।
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जिप्सम बाहर जा रहा, स्थानीय इकाइयां कच्चे माल के लिए परेशान

सिंघला ने कहा कि प्रदेश से जिप्सम बाहर भेजा जा रहा है, जबकि बाड़ी ब्राह्मणा के 16 जिप्सम आधारित उद्योगों को ही पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पा रहा। इसके कारण कई इकाइयों को उत्पादन घटाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि पहले स्थानीय उद्योगों की जरूरत पूरी की जाए, उसके बाद ही जिप्सम बाहर भेजा जाए। उद्योगों की हालत बिगड़ने का असर रोजगार पर भी पड़ रहा है। खासकर सीमा से लगे इलाकों के युवा काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। इससे स्थानीय कारोबार के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
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250 करोड़ बिजली बिल, फिर भी सुविधाएं नहीं

सिंघला ने कहा कि बाड़ी ब्राह्मणा के उद्योग हर साल बिजली विभाग को करीब 250 करोड़ रुपये का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद बिजली का ढांचा बदहाल है। बिजली विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया भी काफी जटिल है, जिसे आसान बनाने की जरूरत है। इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र के लिए विभाग की ओर से केवल दो लाइनमैन तैनात हैं, जिससे उद्योगों को समय पर सेवाएं नहीं मिल पातीं।
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