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वक्फ विधेयक पर प्रस्ताव खारिज करना निराशाजनक: महबूबा

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Rejection of proposal on Wakf Bill disappointing: Mehbooba
अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को वक्फ संशोधन अधिनियम पर स्थगन प्रस्ताव खारिज होने को निराशाजनक करार दिया। साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को भाजपा के मुस्लिम विरोधी एजेंडे के आगे झुकने का आरोप लगाया।
मुफ्ती ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष ने वक्फ विधेयक पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। मजबूत जनादेश हासिल करने के बावजूद, सरकार पूरी तरह से भाजपा के मुस्लिम विरोधी एजेंडे के आगे झुक गई है। दोनों पक्षों को खुश करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि नेकां तमिलनाडु की सरकार से सीख सकती है, जिसने दृढ़ता से विरोध किया है। मुफ्ती ने कहा, जम्मू-कश्मीर एकमात्र मुस्लिम बहुल क्षेत्र में यह चिंताजनक है। सरकार में इस मुद्दे पर बहस करने का भी साहस नहीं है।
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इस बीच, पत्रकारों से बात करते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला देश के मुसलमानों की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं। देश भर के मुसलमानों को उम्मीद थी कि 50 सीटों वाले मुख्यमंत्री आवाज उठाएंगे या कम से कम यह कहेंगे कि वे जम्मू-कश्मीर में इस कानून को लागू नहीं करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मुझे आज शर्म आ रही है। मुफ्ती ने कहा कि देश में मुसलमान असहाय और अल्पसंख्यक हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल और सबसे धर्मनिरपेक्ष राज्य है। लोगों को यहां के नेतृत्व से, सरकार से उम्मीद थी कि वह इस विधेयक का मुखर विरोध करेगी, मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाएगी या विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी।
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मुख्यमंत्री और उनके पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला की ट्यूलिप गार्डन में किरेन रिजिजू से मुलाकात पर कहा, पर्रा (पुलवामा से पीडीपी विधायक) ने प्रस्ताव लाया था। हमें उम्मीद थी कि सीएम विधानसभा में रहेंगे। ट्यूलिप गार्डन एक महीने तक वहां रहेगा। यह कहां जा रहा है? हमने सोचा था कि वह विधानसभा में कहेंगे कि जम्मू-कश्मीर विधेयक को स्वीकार नहीं करता है।’ अगर उन्होंने (फारूक अब्दुल्ला) हमसे बात की होती तो हम दिल्ली जाते। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करते और इसका विरोध करते। ऐसा करने के बजाय, शेर-ए-कश्मीर (नेकां संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला) के बेटे और पोते ने ट्यूलिप गार्डन में उस मंत्री से मुलाकात की, जिन्होंने मुसलमानों की गर्दन पर तलवार रखी हुई थी।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज किया जाना कि मामला विचाराधीन है, मुफ्ती ने पूछा कि अध्यक्ष किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा,जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान और नोटिस नहीं लिया है, तो यह विचाराधीन कैसे है? पर्रा द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए थी।
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