वैष्णों देवी श्रद्धालुओं में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट
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शुक्रवार को छह हजार से भी कम भक्त मां वैष्णो देवी के दर्शनों को रवाना हुए। भक्तों की संख्या में इतनी कमी दस साल बाद देखने को मिली। इससे पहले 13 अगस्त 2008 को अमरनाथ यात्रा विवाद के दौरान छह हजार भक्त दर्शन को रवाना हुए थे। श्राइन बोर्ड के रिकार्ड के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में इन दिनों बौसतन 20 हजार भक्त हर रोज दर्शन करने रवाना होते रहे हैं।
पंजीकरण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार आठ सितंबर को फिर से यात्रा शुरू करने पर उस दिन 29348 यात्रियों ने पंजीकरण कराया था। दोपहर में बारिश होने पर फिर से यात्रा रोक दी गई थी। इस दौरान 17,700 यात्री बाण गंगा से आगे भेजे गए थे, जबकि अन्य यात्रियों को आगे जाने से रोक दिया गया था। मंगलवार को यह संख्या गिरकर 9095 तक पहुंच गई थी।
बुधवार को 5958 और वीरवार को 5863 यात्रियों ने ही भवन में माथा टेका था। शुक्रवार देर शाम तक कक्ष के बंद होने से दो घंटे पहले भक्तों की संख्या मात्र पांच हजार तक ही पहुंच पाई थी। पिछले दस वर्षों के यात्रा के आंकड़े पर अगर नजर डालें तो पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि एक दिन में भक्तों की संख्या छह हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर पा रही है।
प्राकृतिक गुफा से होने लगे भक्तों के दर्शन
श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट के कारण भवन में प्राकृतिक गुफा को दर्शन के लिए खोल दिया गया है। इस गुफा को सुबह और शाम
की आरती के एक घंटे बाद तक बंद रखा जा रहा है। इसके अलावा भक्तों को
प्राकृतिक गुफा से दर्शन करने दिए जा रहे हैं।
दर्शन के बाद यात्रियों का निकास कृत्रिम गुफा से ही करवाया जा रहा है। यह भी संभवत: पहला मौका ही है कि जनवरी और फरवरी के अलावा किसी महीने में प्राकृतिक गुफा को खोला गया हो।
जनवरी-फरवरी में रहती है मंदी
अमूमन हर वर्ष यात्रियों की सबसे कम संख्या जनवरी और फरवरी में रहती है। उस दौरान भी हर रोज आठ से दस हजार के करीब यात्री दर्शन करने पहुंचते हैं। अगस्त और सितंबर में यात्रियों की संख्या प्रतिदिन करीब 20 हजार रहती है।