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Jammu News: हथकरघा को बढ़ावा दे रहीं सिला की निर्मल
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अपने बनाए उत्पाद के साथ सिला की निर्मल कौर।
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। जिला मुख्यालय के साथ लगती पंचायत सिला के वार्ड तीन निवासी निर्मल कौर हाथों से सामान तैयार कर हथकरघा को प्रोत्साहित कर रही हैं। नीलकमल नाम से बनाए गए सेल्फ हेल्प ग्रुप के तहत उन के पास क्लस्टर ए रियासी में 228 ग्रुप हैं जिसमें उन के साथ कई महिलाएं व युवतियां भी जुड़ी हैं।
स्वयं निर्मल कौर पूरे क्लस्टर की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं और ग्रुप में शामिल महिलाओं व युवतियों को हाथों से बनाए जाने वाले सामान का भी प्रशिक्षण देती हैं। निर्मल कौर के अनुसार वह ज्यादातर ऊनी उत्पाद बनाती हैं जिसमें मुख्य रूप से पुरुषों व महिलाओं के स्वेटर, मफलर, जुराबें, टोपी,बैग, टोकरी व अन्य सामान वगैरह शामिल हैं। हाल ही में पिछले दिनों उन्होंने ऊन से रंग-बिरंगी राखियां बनाईं। जिस को बाजार में काफी पहचान मिली।
लोगों खास कर महिलाओं ने बनाई हुई राखी को हाथों हाथ खरीदा। सामान बनाने के लिए वह वूलन का सारा सामना लुधियाना से मंगवाती है जोकि उन्हें जम्मू या फिर रियासी के बाजारों से काफी सस्ता मिलता है। वह स्वयं पिछले बीस वर्षों से हथकरघा से जुड़ी हुई है। इस दौरान उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माड़ी स्थित ऑफिस में आठ वर्षों तक नौकरी भी की। पिछले आठ वर्षों से वह अपना सेल्फ हेल्प ग्रुप बना इसे चला रही है जिसका फायदा उन्हें व उन के साथ जुड़ी महिलाओं युवतियों को पहुंच रहा है। बेचने के लिए सामान घर के अलावा बारादरी में अपनी दुकान पर रखा है वहीं कटड़ा में भी उन के ग्रुप का सामान बाजार में है। हाल ही में उन्हें विभाग की तरफ से श्रीनगर में होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का न्यौता मिला है जिस में वह तीन अन्य महिलाओं के साथ शामिल होने जा रही है।
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रियासी। जिला मुख्यालय के साथ लगती पंचायत सिला के वार्ड तीन निवासी निर्मल कौर हाथों से सामान तैयार कर हथकरघा को प्रोत्साहित कर रही हैं। नीलकमल नाम से बनाए गए सेल्फ हेल्प ग्रुप के तहत उन के पास क्लस्टर ए रियासी में 228 ग्रुप हैं जिसमें उन के साथ कई महिलाएं व युवतियां भी जुड़ी हैं।
स्वयं निर्मल कौर पूरे क्लस्टर की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं और ग्रुप में शामिल महिलाओं व युवतियों को हाथों से बनाए जाने वाले सामान का भी प्रशिक्षण देती हैं। निर्मल कौर के अनुसार वह ज्यादातर ऊनी उत्पाद बनाती हैं जिसमें मुख्य रूप से पुरुषों व महिलाओं के स्वेटर, मफलर, जुराबें, टोपी,बैग, टोकरी व अन्य सामान वगैरह शामिल हैं। हाल ही में पिछले दिनों उन्होंने ऊन से रंग-बिरंगी राखियां बनाईं। जिस को बाजार में काफी पहचान मिली।
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लोगों खास कर महिलाओं ने बनाई हुई राखी को हाथों हाथ खरीदा। सामान बनाने के लिए वह वूलन का सारा सामना लुधियाना से मंगवाती है जोकि उन्हें जम्मू या फिर रियासी के बाजारों से काफी सस्ता मिलता है। वह स्वयं पिछले बीस वर्षों से हथकरघा से जुड़ी हुई है। इस दौरान उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माड़ी स्थित ऑफिस में आठ वर्षों तक नौकरी भी की। पिछले आठ वर्षों से वह अपना सेल्फ हेल्प ग्रुप बना इसे चला रही है जिसका फायदा उन्हें व उन के साथ जुड़ी महिलाओं युवतियों को पहुंच रहा है। बेचने के लिए सामान घर के अलावा बारादरी में अपनी दुकान पर रखा है वहीं कटड़ा में भी उन के ग्रुप का सामान बाजार में है। हाल ही में उन्हें विभाग की तरफ से श्रीनगर में होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का न्यौता मिला है जिस में वह तीन अन्य महिलाओं के साथ शामिल होने जा रही है।
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