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भगवान शिव की भक्ति पापी को भी तार देती है : सूरज कौशल
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रियासी।वीरवार को महा शिव पुराण कथा में आरती करती महिलाएं।फोटो, संवाद।
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्री सनातन धर्म सभा में जारी शिव महापुराण कथा में सूरज कौशल ने कहा कि शिव की पूजा और प्रसाद से लोगों की जिंदगी बदल जाती है। कौशल जी ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति पापी को तार देती है और पापों को नष्ट करती है।
एक कहानी के अनुसार कापिलय नगर में यज्ञ दत्त नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसके घर एक पुत्र था जिसने यज्ञोपवीति संस्कार आठ वर्ष की आयु में ही ग्रहण कर लिए। गुणनिधि नामक बालक कई विद्याओं का ज्ञाता बना। इस दौरान उसमें कई अवगुण भी आ गए। वह जुआ खेलने के साथ ही नाचने वाली महिलाओं की महफिलों में जाने लगा। चोरी की आदत पड़ने पर उसने घर पर ही चोरी करना शुरू किया।
एक व्यक्ति के पास अंगूठी देख यज्ञ दत्त ने उसे अपनी कहानी बताई तो उक्त व्यक्ति ने गुणनिधि के बारे में जानकारी दी। यज्ञदत्त मुंह छिपाकर घर पहुंच व पत्नी द्वारा यह बात छिपाने की वजह से उसने दोनों को त्याग दिया। गुणनिधि को इसकी जानकारी मिली तो वह किसी दूसरी जगह जाकर पश्चाताप करने लगा। एक शिव मंदिर के बाहर बैठ वह वहां होने वाली आरती व भजनों का अनुसरण करने लगा। भूख लगने पर वह चोरी छिपे मंदिर के भीतर घर और वहां पर शिवलिंग के पास चढ़ा प्रसाद उठा कर ले जाने लगा।
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रक्षकों ने चोर समझ उसकी पिटाई की जिससे वह मर गया। यमलोक से आए यमदूत उसे ले जाने लगे तो मौके पर भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि इसने लाख बुराई होते हुए भी दीपक की छाया का निवारण किया। अपने वस्त्र फाड़ कर दीये के लिए बाती बनाई। उसे जलाया शिव दर्शन किए और पूजा की। इसे सभी पापों से मुक्त किया जाता है। अब यह यहीं रहेगा और अगले जनम में कलिंग देश का राजा बनेगा।
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रियासी। श्री सनातन धर्म सभा में जारी शिव महापुराण कथा में सूरज कौशल ने कहा कि शिव की पूजा और प्रसाद से लोगों की जिंदगी बदल जाती है। कौशल जी ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति पापी को तार देती है और पापों को नष्ट करती है।
एक कहानी के अनुसार कापिलय नगर में यज्ञ दत्त नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसके घर एक पुत्र था जिसने यज्ञोपवीति संस्कार आठ वर्ष की आयु में ही ग्रहण कर लिए। गुणनिधि नामक बालक कई विद्याओं का ज्ञाता बना। इस दौरान उसमें कई अवगुण भी आ गए। वह जुआ खेलने के साथ ही नाचने वाली महिलाओं की महफिलों में जाने लगा। चोरी की आदत पड़ने पर उसने घर पर ही चोरी करना शुरू किया।
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एक व्यक्ति के पास अंगूठी देख यज्ञ दत्त ने उसे अपनी कहानी बताई तो उक्त व्यक्ति ने गुणनिधि के बारे में जानकारी दी। यज्ञदत्त मुंह छिपाकर घर पहुंच व पत्नी द्वारा यह बात छिपाने की वजह से उसने दोनों को त्याग दिया। गुणनिधि को इसकी जानकारी मिली तो वह किसी दूसरी जगह जाकर पश्चाताप करने लगा। एक शिव मंदिर के बाहर बैठ वह वहां होने वाली आरती व भजनों का अनुसरण करने लगा। भूख लगने पर वह चोरी छिपे मंदिर के भीतर घर और वहां पर शिवलिंग के पास चढ़ा प्रसाद उठा कर ले जाने लगा।
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रक्षकों ने चोर समझ उसकी पिटाई की जिससे वह मर गया। यमलोक से आए यमदूत उसे ले जाने लगे तो मौके पर भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि इसने लाख बुराई होते हुए भी दीपक की छाया का निवारण किया। अपने वस्त्र फाड़ कर दीये के लिए बाती बनाई। उसे जलाया शिव दर्शन किए और पूजा की। इसे सभी पापों से मुक्त किया जाता है। अब यह यहीं रहेगा और अगले जनम में कलिंग देश का राजा बनेगा।