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Jammu News: भारी बारिश से 20 वर्ष बाद भीमगढ़ किले को पहुंचा नुकसान
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रियासी।भीमगढ़ किला की एक हिस्से की गिरी दीवार।फोटो,संवाद।
- दरिया चिनाब का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा, सलाल डैम के 12 गेट खोले
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। 20 वर्ष बाद स्थानीय भीमगढ़ किले को एक बार फिर से बारिश से नुकसान पहुंचा है। किले की एक दीवार क्षतिग्रस्त होकर बुधवार को जमींदोज हो गई। इससे पहले वर्ष 2005 में आए भूकंप से किले की इसी दीवार और एक बड़े हिस्से को काफी नुकसान हुआ था।
उस समय भूकंप के कारण दीवार का काफी हिस्सा गिर गया था। बाद में किले की दीवार व क्षतिग्रस्त अन्य हिस्से को बनाने का काम किया गया। बारिश से किले की दीवार मंगलवार रात को गिरी या बुधवार सुबह, इसका कुछ पता नहीं चल पाया है। बुधवार की सुबह कुछ देर के लिए बारिश थमी तो किले की गिरी दीवार दिखाई दी। वहीं बारिश से जिले की कई सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है।
जिला मुख्यालय से कटड़ा की तरफ जाने वाले सुला शार्ट कट मार्ग पर कई स्थान पर भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से पस्सी व मिट्टी का मलबा पेड़-पौधों के साथ सड़क पर आ गिरा। वहीं सिंबल चोया के पास कला मोड़ में सड़क का एक हिस्सा पहाड़ी से नीचे गिर गया। कटड़ा जाने वाले इस मार्ग पर से बड़े वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। छोटे वाहन भी काफी संभल कर गुजरें। जरूरी काम से जाने वाले लोग ही सफर को निकले।
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बारिश से सुला बारादरी मार्ग, माड़ी से ज्योतिपुरम मार्ग, सुला से दसानू पनासा मार्ग, टाली मोड़ से जेड़ी मार्ग, तलवाड़ा से डैम टॉप की तरफ जाने वाला मार्ग पर पस्सी और पत्थर गिरे। सलाल-अरनास मार्ग पर भी कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ। तहसील माहौर के कई मार्गों पर भी भूस्खलन होने की सूचना है।
बारिश से बुधवार को दरिया चिनाब का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। उधर सलाल बिजली परियोजना के बांध के 12 गेट खोले गए। विभाग के मुताबिक अब तक बांध से एक लाख 12 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा जा चुका है। अंजी तवी नदी भी बुधवार को पूरे उफान पर दिखी। पास में खेतों में भी अंजी का पानी घुस आया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। 20 वर्ष बाद स्थानीय भीमगढ़ किले को एक बार फिर से बारिश से नुकसान पहुंचा है। किले की एक दीवार क्षतिग्रस्त होकर बुधवार को जमींदोज हो गई। इससे पहले वर्ष 2005 में आए भूकंप से किले की इसी दीवार और एक बड़े हिस्से को काफी नुकसान हुआ था।
उस समय भूकंप के कारण दीवार का काफी हिस्सा गिर गया था। बाद में किले की दीवार व क्षतिग्रस्त अन्य हिस्से को बनाने का काम किया गया। बारिश से किले की दीवार मंगलवार रात को गिरी या बुधवार सुबह, इसका कुछ पता नहीं चल पाया है। बुधवार की सुबह कुछ देर के लिए बारिश थमी तो किले की गिरी दीवार दिखाई दी। वहीं बारिश से जिले की कई सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है।
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जिला मुख्यालय से कटड़ा की तरफ जाने वाले सुला शार्ट कट मार्ग पर कई स्थान पर भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से पस्सी व मिट्टी का मलबा पेड़-पौधों के साथ सड़क पर आ गिरा। वहीं सिंबल चोया के पास कला मोड़ में सड़क का एक हिस्सा पहाड़ी से नीचे गिर गया। कटड़ा जाने वाले इस मार्ग पर से बड़े वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। छोटे वाहन भी काफी संभल कर गुजरें। जरूरी काम से जाने वाले लोग ही सफर को निकले।
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बारिश से सुला बारादरी मार्ग, माड़ी से ज्योतिपुरम मार्ग, सुला से दसानू पनासा मार्ग, टाली मोड़ से जेड़ी मार्ग, तलवाड़ा से डैम टॉप की तरफ जाने वाला मार्ग पर पस्सी और पत्थर गिरे। सलाल-अरनास मार्ग पर भी कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ। तहसील माहौर के कई मार्गों पर भी भूस्खलन होने की सूचना है।
बारिश से बुधवार को दरिया चिनाब का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। उधर सलाल बिजली परियोजना के बांध के 12 गेट खोले गए। विभाग के मुताबिक अब तक बांध से एक लाख 12 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा जा चुका है। अंजी तवी नदी भी बुधवार को पूरे उफान पर दिखी। पास में खेतों में भी अंजी का पानी घुस आया।