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नारद के शाप से विष्णु को लेना पड़ा राम अवतार : कथा वाचक
Sun, 28 Jul 2024 02:59 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 28 Jul 2024 02:59 AM IST
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श्री सनातन धर्म सभा में महा शिव पुराण कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्री सनातन धर्म सभा में महा शिव पुराण कथा जारी है। सातवें दिन शनिवार को कथा वाचक सूरज कौशल शास्त्री ने संगत को प्रभु श्रीराम की महिमा से करवाया है।
उन्होंने बताया कि एक बार ऋषि नारद मुनि भगवान विष्णु के पास आते हैं और उनसे हरि मुख देने के लिए कहते हैं। इससे विष्णु कुछ विचलित होते हैं और सोचते हैं कि एक हरि मुख्य मेरा है और दूसरा वानर का है। मैं अपना मुख्य इन्हें दे नहीं सकता। इसलिए वानर मुख दे देता हूं।
नारद को वानर मुख मिला तो वह क्रोधित हो गए। उन्होंने कहा कि आपने एक वानर की शक्ति को नहीं पहचाना और उसकी शक्ल को क्रूप जान कर उस का मुख मुझे दे दिया। नारद मुनि विष्णु को शाप देते है कि पाप के अंत के लिए उन्हें धरती पर मानव रूप में जन्म लेना पड़ेगा। उनकी स्त्री को कोई हरण कर लेगा। उसकी तलाश में जंगलों में भटकते समय वानरों ही सहायता करेंगे और अंजाम तक पहुंचाएंगे।
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ऋषि के शाप के बाद विष्णु को राम के अवतार में राजा दशरथ के घर जन्म लिया। सीता से विवाह के बाद उन्हें राजगद्दी के स्थान पर चौदह वर्ष का बनवास मिला। रावण सीता का हरण कर ले गया। उनकी तलाश में राम के साथ पहले वानर स्वरूप हनुमान और बाद में पूरी वानर सेना आई। कथा का समापन आरती के साथ किया गया। बाद में सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
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रियासी। श्री सनातन धर्म सभा में महा शिव पुराण कथा जारी है। सातवें दिन शनिवार को कथा वाचक सूरज कौशल शास्त्री ने संगत को प्रभु श्रीराम की महिमा से करवाया है।
उन्होंने बताया कि एक बार ऋषि नारद मुनि भगवान विष्णु के पास आते हैं और उनसे हरि मुख देने के लिए कहते हैं। इससे विष्णु कुछ विचलित होते हैं और सोचते हैं कि एक हरि मुख्य मेरा है और दूसरा वानर का है। मैं अपना मुख्य इन्हें दे नहीं सकता। इसलिए वानर मुख दे देता हूं।
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नारद को वानर मुख मिला तो वह क्रोधित हो गए। उन्होंने कहा कि आपने एक वानर की शक्ति को नहीं पहचाना और उसकी शक्ल को क्रूप जान कर उस का मुख मुझे दे दिया। नारद मुनि विष्णु को शाप देते है कि पाप के अंत के लिए उन्हें धरती पर मानव रूप में जन्म लेना पड़ेगा। उनकी स्त्री को कोई हरण कर लेगा। उसकी तलाश में जंगलों में भटकते समय वानरों ही सहायता करेंगे और अंजाम तक पहुंचाएंगे।
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ऋषि के शाप के बाद विष्णु को राम के अवतार में राजा दशरथ के घर जन्म लिया। सीता से विवाह के बाद उन्हें राजगद्दी के स्थान पर चौदह वर्ष का बनवास मिला। रावण सीता का हरण कर ले गया। उनकी तलाश में राम के साथ पहले वानर स्वरूप हनुमान और बाद में पूरी वानर सेना आई। कथा का समापन आरती के साथ किया गया। बाद में सभी को प्रसाद वितरित किया गया।