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शांति सबके भीतर, बस उसे जानने की जरूरत : शास्त्री
Mon, 16 Sep 2024 06:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 16 Sep 2024 06:30 AM IST
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वार्ड छह के गड़ाल मोहल्ले में श्रीमद्भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। शांति हर मनुष्य के भीतर है। बस उसे सिर्फ जानने की जरूरत है। यह ज्ञान संत सुभाष शास्त्री ने रविवार को नगर के वार्ड छह के गड़ाल मोहल्ले में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन संगत को दिया।
उन्होंने बताया कि हर मनुष्य का जीवन सिर्फ मानसिक तौर पर शांति को प्राप्त करने में ही निकल जाता है। वह हर चीज को पाने की लालसा करता है। सबकुछ होने के बावजूद भी उसके पास कुछ नहीं है वह ऐसा सोचता रहता है। सब मिलने पर वह सुखी होगा ऐसा सोचता है।
लेकिन, ऐसा होता नहीं है। क्योंकि, जो भी प्राप्त होगा वह या तो छूट जाएगा या फिर उससे मनुष्य का दिल भर जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रश्न यह है कि स्थायी शांति प्राप्त प्राप्त की जाए। इसका सिर्फ एक ही जवाब है कि शांति को अपने अंदर ढूंढो और हर चीज से संतुष्ट रहो।
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स्वयं का मनन करने से मन वश में होता है। संसार बहुत बड़ा है, लेकिन आप एक ही हो, उसी एक में से आप ने अपने आप को तलाश करना है। रविवार को कथा के समापन पर संगत में प्रसाद वितरित किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। शांति हर मनुष्य के भीतर है। बस उसे सिर्फ जानने की जरूरत है। यह ज्ञान संत सुभाष शास्त्री ने रविवार को नगर के वार्ड छह के गड़ाल मोहल्ले में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन संगत को दिया।
उन्होंने बताया कि हर मनुष्य का जीवन सिर्फ मानसिक तौर पर शांति को प्राप्त करने में ही निकल जाता है। वह हर चीज को पाने की लालसा करता है। सबकुछ होने के बावजूद भी उसके पास कुछ नहीं है वह ऐसा सोचता रहता है। सब मिलने पर वह सुखी होगा ऐसा सोचता है।
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लेकिन, ऐसा होता नहीं है। क्योंकि, जो भी प्राप्त होगा वह या तो छूट जाएगा या फिर उससे मनुष्य का दिल भर जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रश्न यह है कि स्थायी शांति प्राप्त प्राप्त की जाए। इसका सिर्फ एक ही जवाब है कि शांति को अपने अंदर ढूंढो और हर चीज से संतुष्ट रहो।
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स्वयं का मनन करने से मन वश में होता है। संसार बहुत बड़ा है, लेकिन आप एक ही हो, उसी एक में से आप ने अपने आप को तलाश करना है। रविवार को कथा के समापन पर संगत में प्रसाद वितरित किया गया।