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अपने भक्तों की रक्षा करते कृष्ण गोविंद गोपाल : शास्त्री
Sat, 24 Aug 2024 02:45 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 24 Aug 2024 02:45 AM IST
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श्री सनातन धर्म सभा में श्रीमद्भागवत कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्री सनातन धर्म सभा में श्रीमद्भागवत कथा जारी है। शुक्रवार को सूरज कौशल शास्त्री ने बताया कि जिन की रक्षा स्वयं भगवान कृष्ण करते है उन का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।
भरी सभा में जब सब के सामने द्रोपदी का चीरहरण किया जा रहा था तो वहां बैठे लोग सब देखते रहे। विलाप करते हुए द्रोपदी ने आंखें बंद कर भगवान कृष्ण को याद किया और मदद मांगी। तब भगवान कृष्ण ही उस के पालनहार बन कर आए।
कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध चल रहा था बलशाली भीम ने अपने प्रहार से दुर्योधन की जंघा को तोड़ दी। दर्द से कराहते हुए दुर्योधन के पास अश्वत्थामा पहुंचे और उनसे उनसे जानकारी हासिल की। वह पांडवों को मारने के लिए निकला। एक स्थान पर पांडव सो रहे होते हैं, लेकिन भगवान कृष्ण जाग कर पहरा दे रहे होते हैं।
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अर्जुन की नींद खुलने पर वह कृष्ण को जागने का कारण पूछते हं जिसे बताने की वजाय वह उन सभी को वहां से किसी दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। इससे उन के प्राण बच जाते हैं कि लेकिन द्रोपदी के पांचों पुत्र अश्वत्थामा के हाथों मारे जाते हैं। प्रभु सिमरण करने वालों से कई प्रकार के दुख कष्ट स्वयं ही दूर चले जाते हैं। कथा का रविवार को समापन होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्री सनातन धर्म सभा में श्रीमद्भागवत कथा जारी है। शुक्रवार को सूरज कौशल शास्त्री ने बताया कि जिन की रक्षा स्वयं भगवान कृष्ण करते है उन का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।
भरी सभा में जब सब के सामने द्रोपदी का चीरहरण किया जा रहा था तो वहां बैठे लोग सब देखते रहे। विलाप करते हुए द्रोपदी ने आंखें बंद कर भगवान कृष्ण को याद किया और मदद मांगी। तब भगवान कृष्ण ही उस के पालनहार बन कर आए।
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कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध चल रहा था बलशाली भीम ने अपने प्रहार से दुर्योधन की जंघा को तोड़ दी। दर्द से कराहते हुए दुर्योधन के पास अश्वत्थामा पहुंचे और उनसे उनसे जानकारी हासिल की। वह पांडवों को मारने के लिए निकला। एक स्थान पर पांडव सो रहे होते हैं, लेकिन भगवान कृष्ण जाग कर पहरा दे रहे होते हैं।
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अर्जुन की नींद खुलने पर वह कृष्ण को जागने का कारण पूछते हं जिसे बताने की वजाय वह उन सभी को वहां से किसी दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। इससे उन के प्राण बच जाते हैं कि लेकिन द्रोपदी के पांचों पुत्र अश्वत्थामा के हाथों मारे जाते हैं। प्रभु सिमरण करने वालों से कई प्रकार के दुख कष्ट स्वयं ही दूर चले जाते हैं। कथा का रविवार को समापन होगा।