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जानिए क्यों जम्मू-कश्मीर के कठुआ सामूहिक दुष्कर्म मामले की सुनवाई हुई थी पंजाब के पठानकोट में
Tue, 11 Jun 2019 02:02 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 11 Jun 2019 02:02 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सात मई 2018 को कठुआ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले की सीबीआई जांच से इंकार करते हुए केस पठानकोट कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। साथ ही मामले की सुनवाई रोज करने का आदेश दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले को जम्मू-कश्मीर से बाहर ट्रांसफर करने का फैसला पीड़ित परिवार, राज्य सरकार और आरोपियों की सहमति के बाद लिया था।
पीठ ने कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसके लिए पीड़ित परिवार, आरोपी और गवाह भयमुक्त वातावरण महसूस करें। इस वजह से मामले की सुनवाई पठानकोट में अतिरिक्त सत्र न्यायालय में रोजाना होगी। सुनवाई ओपन कोर्ट में न होकर इन कैमरा होगी।
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पीठ ने सीबीआई जांच को इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी। इस वजह से दूसरी जांच एजेंसी को जांच नहीं सौंपा जा सकता था। सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों को उर्दू से अंग्रेजी में करने निर्देश दिया था। पीड़ित पक्ष, वकील, आरोपियों को ट्रायल के दौरान वाहन तथा सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की हिदायत भी दी गयी थी।
चार्जशीट दाखिल करने से रोकने का प्रयास किया गया
चार्जशीट सामने आने के बाद प्रदेश में तनाव बढ़ गया था। कुछ वकीलों ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। यहां तक कि चार्जशीट दाखिल करने पहुंची क्राइम ब्रांच टीम को भी वकीलों के समूह ने रोकने की कोशिश की थी।
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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले को जम्मू-कश्मीर से बाहर ट्रांसफर करने का फैसला पीड़ित परिवार, राज्य सरकार और आरोपियों की सहमति के बाद लिया था।
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पीठ ने कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसके लिए पीड़ित परिवार, आरोपी और गवाह भयमुक्त वातावरण महसूस करें। इस वजह से मामले की सुनवाई पठानकोट में अतिरिक्त सत्र न्यायालय में रोजाना होगी। सुनवाई ओपन कोर्ट में न होकर इन कैमरा होगी।
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पीठ ने सीबीआई जांच को इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी। इस वजह से दूसरी जांच एजेंसी को जांच नहीं सौंपा जा सकता था। सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों को उर्दू से अंग्रेजी में करने निर्देश दिया था। पीड़ित पक्ष, वकील, आरोपियों को ट्रायल के दौरान वाहन तथा सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की हिदायत भी दी गयी थी।
चार्जशीट दाखिल करने से रोकने का प्रयास किया गया
चार्जशीट सामने आने के बाद प्रदेश में तनाव बढ़ गया था। कुछ वकीलों ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। यहां तक कि चार्जशीट दाखिल करने पहुंची क्राइम ब्रांच टीम को भी वकीलों के समूह ने रोकने की कोशिश की थी।