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बच्चों की मौत पर पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ के मुआवजे की मांग
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जम्मू। इसी साल जनवरी माह में रामनगर तहसील में एक साथ कई बच्चों की मौत मामले में पीड़ित परिवाराें को न्याय की आस बंधी है। सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश खजूरिया ने मानवाधिकार आयोग को दी याचिका में पीड़ित परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। साथ ही लापरवाही के लिए जिम्मेवार लोगाें पर कार्रवाई करने की अपील की है। याची ने तर्क दिया है कि दिल्ली में दंगों के दौरान एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मी की मौत हो गई थी। सरकार ने उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी और परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया। रामनगर में सरकारी लापरवाही से बच्चे खोने वाले परिवार बेहद गरीब हैं। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी इन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया।
सुकेश खजूरिया ने याचिका में कहा है कि देश भर में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। मुनाफाखोरी के चलते नकली दवाओं से लोगाें की जान ले ली जाती है। लेकिन बड़े स्तर पर गठजोड़ के चलते पीड़ित परिवाराें की सुध नहीं ली जाती और ना ही सरकारी अफसरों की जवाबदेही तय हो पाती है।
लापरवाही की भेंट चढ़ गए थे यह नौनिहाल
श्रेयांश (18 माह) पुत्र मदन लाल, कनिश्क डोगरा (3 वर्ष) पुत्र सुशील डोगरा, जाह्नवी (11 माह) पुत्री अनिल कुमार, लक्ष्मी (18 माह) पुत्री राजकुमार, अमित (4 वर्ष) पुत्र रतन चंद, सुरभि (3 वर्ष) पुत्री गोविंद राम, अनिरुद्ध (2 वर्ष) पुत्र अशोक कुमार, पंकू (1 वर्ष) पुत्र रमेश, अक्षु (18 माह) पुत्र संजय कुमार, निज्जू (1 वर्ष) पुत्र कुलदीप और जानू (2 वर्ष) पुत्र ठाकुर दास
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सुकेश खजूरिया ने याचिका में कहा है कि देश भर में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। मुनाफाखोरी के चलते नकली दवाओं से लोगाें की जान ले ली जाती है। लेकिन बड़े स्तर पर गठजोड़ के चलते पीड़ित परिवाराें की सुध नहीं ली जाती और ना ही सरकारी अफसरों की जवाबदेही तय हो पाती है।
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लापरवाही की भेंट चढ़ गए थे यह नौनिहाल
श्रेयांश (18 माह) पुत्र मदन लाल, कनिश्क डोगरा (3 वर्ष) पुत्र सुशील डोगरा, जाह्नवी (11 माह) पुत्री अनिल कुमार, लक्ष्मी (18 माह) पुत्री राजकुमार, अमित (4 वर्ष) पुत्र रतन चंद, सुरभि (3 वर्ष) पुत्री गोविंद राम, अनिरुद्ध (2 वर्ष) पुत्र अशोक कुमार, पंकू (1 वर्ष) पुत्र रमेश, अक्षु (18 माह) पुत्र संजय कुमार, निज्जू (1 वर्ष) पुत्र कुलदीप और जानू (2 वर्ष) पुत्र ठाकुर दास
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