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यादों के झरोखे से राम जेठमलानी- जब तक मैं जिंदा हूं, जिंदा रहेगी कश्मीर कमेटी
Sun, 08 Sep 2019 06:33 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 08 Sep 2019 06:33 PM IST
सार
- कश्मीर मामला सुलझाने के लिए हमेशा से करते रहे कोशिश
- 2002 में बनी कश्मीर कमेटी के अध्यक्ष रहे जेठमलानी
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राम जेठमलानी (फाइल फोटो)
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विस्तार
भारतीय राजनीति और वकालत में महारथ हासिल करने वाले राम जेठमलानी को कश्मीर से हमेशा लगाव रहा है। 2002 में अलगाववादियों से बातचीत करने के लिए एक कमेटी बनी थी, जिसके अध्यक्ष राम जेठमलानी थे। हालांकि यह कमेटी अधिकारिक तौर पर नहीं थी। जेठमलानी हमेशा चाहते थे कि कश्मीर मसला हल हो। 2014 में कश्मीर पहुंचे जेठमलानी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक कश्मीर कमेटी जिंदा रहेगी।
दरअसल, 2002 में कश्मीर में अलगाववादियों से बात करने के लिए कश्मीर कमेटी बनाई थी, जिसका गठन जेठमलानी ने खुद किया था। इस कमेटी में रिटायर आईएफएस अफसर विनोद ग्रोवर, वरिष्ठ वकील अशोक भान, फाली नरीमन, शांति भूषण, टाइम्स आफ इंडिया के एडिटर दिलीप पडगांवकर और एशियन एज के एडिटर एम जे अकबर भी थे। तब जम्मू कश्मीर में चुनाव होने थे।
जेठमलानी कश्मीर आए और उन्होंने शब्बीर शाह से मुलाकात करनी चाही। जेठमलानी ने कहा था कि वह किसी की वकालत करने नहीं आए। वह तो चाहते हैं कि कश्मीर मसला हल हो, लेकिन इसके लिए बातचीत होनी चाहिए। तब कमेटी ने शब्बीर शाह सहित कई कश्मीरी नेताओं से बातचीत की।
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जम्मू में भी लोगों से बातचीत की और इसकी रिपोर्ट केंद्र को सौंपी। इसके बाद जब 2014 में जेठमलानी कश्मीर दौरे पर आए थे तो पत्रकारों ने उन्हें कमेटी के बारे में पूछा था। तब जेठमलानी ने कहा था कि जब तक वह जिंदा हैं, कश्मीर कमेटी जिंदा रहेगी। वह भाजपा की तरफ कश्मीर में नहीं आए। न ही चुनाव को लेकर आए हैं।
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दरअसल, 2002 में कश्मीर में अलगाववादियों से बात करने के लिए कश्मीर कमेटी बनाई थी, जिसका गठन जेठमलानी ने खुद किया था। इस कमेटी में रिटायर आईएफएस अफसर विनोद ग्रोवर, वरिष्ठ वकील अशोक भान, फाली नरीमन, शांति भूषण, टाइम्स आफ इंडिया के एडिटर दिलीप पडगांवकर और एशियन एज के एडिटर एम जे अकबर भी थे। तब जम्मू कश्मीर में चुनाव होने थे।
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जेठमलानी कश्मीर आए और उन्होंने शब्बीर शाह से मुलाकात करनी चाही। जेठमलानी ने कहा था कि वह किसी की वकालत करने नहीं आए। वह तो चाहते हैं कि कश्मीर मसला हल हो, लेकिन इसके लिए बातचीत होनी चाहिए। तब कमेटी ने शब्बीर शाह सहित कई कश्मीरी नेताओं से बातचीत की।
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जम्मू में भी लोगों से बातचीत की और इसकी रिपोर्ट केंद्र को सौंपी। इसके बाद जब 2014 में जेठमलानी कश्मीर दौरे पर आए थे तो पत्रकारों ने उन्हें कमेटी के बारे में पूछा था। तब जेठमलानी ने कहा था कि जब तक वह जिंदा हैं, कश्मीर कमेटी जिंदा रहेगी। वह भाजपा की तरफ कश्मीर में नहीं आए। न ही चुनाव को लेकर आए हैं।