घर आई फसल ना खाने लायक ना बेचने लायक
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बेमौसम बारिश के बाद बची हुई फसल को समेट रहे किसान रो रहे हैं। गेहूं की फसल के दाने सामान्य आकार से छोटे और सिकुड़े हुए हैं, जो खाने लायक भी नहीं। यही नहीं, किसानों की इस फसल को कोई खरीदने वाला भी नहीं मिल रहा।
आमतौर पर गेहूं की फसल 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक जाती है, लेकिन इस बार फसल को यह दाम नहीं मिल रहे। किसान फसल लेकर बेचने जा रहे हैं, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिल रहा।
गेहूं की फसल पर कृषि एवं तकनीकी विज्ञान विश्वविद्यालय के रिसर्च विभाग के निदेशक जेपी शर्मा से बात की गई। उन्होंने कहा कि किसानों का दर्द जायज है और उनकी परेशानी भी। बेमौसम बारिश की वजह से गेहूं की बची हुई फसल सामान्य श्रेणी की भी नहीं है।
बिगड़ैल मौसम की दाने पर मार, रंग भी पड़ा काला
सामान्य तौर पर होने वाली गेहूं की फसल अच्छी होती है। जब इसका आटा निकलता है तो साफ-सुथरा होता है, लेकिन मौजूदा गेहूं के दाने काले पड़ चुके हैं, जिनका आटा भी खाने लायक नहीं होगा। गेहूं की गुणवत्ता में काफी फर्क आ गया है।
वहीं किसानों को प्रति कनाल भूमि पर गेहूं की 20 से 30 किलो फसल ही मिल रही है, जबकि सामान्य तौर पर फसल डेढ़ से दो क्विंटल होती है। किसानों से बात करने पर जोगिंदर पाल ने बताया कि न तो फसल बिकने के काबिल है न ही खाने के लायक।
समझ नहीं आ रहा कि फसल को करें क्या। राज्य किसान संघ के अध्यक्ष राजेश शर्मा का कहना है कि सरकार को चाहिए कि किसानों को बाहरी राज्यों या फिर पिछले वर्ष के गेहूं की निशुल्क सुविधा दी जाए, ताकि किसानों को खाने के लाले न पड़ें।