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Jammu News: सड़कें उखाड़ने के बाद बनाने के लिए पैसे नहीं दे रहे विभाग, पीडब्ल्यूडी को 2.75 करोड़ का नुकसान

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PWD, Government departments, not giving money, roads
सतीश वालिया
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जम्मू। शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अलग-अलग विभाग सड़कों को उखाड़ रहे हैं। मगर दोबारा तारकोल डालने के लिए राशि देने या फिर खुद सड़कें नहीं बनवा रहे। नतीजन, लोक निर्माण विभाग को तारकोल बिछाना पड़ रहा है। डीपीआर में तारकोल डालने या पैसा देने के लिए अलग से व्यवस्था रहती है, लेकिन हो यह रहा है कि सड़कें उखाड़ने के बाद विभाग बजट खर्च होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
विभागों की लापरवाही के कारण लोक निर्माण विभाग को अब तक करोड़ों की चपत लग चुकी है। पांच सड़कों पर 24 बार खोदाई होने से 2.75 करोड़ बर्बाद हुए हैं। इसकी एक उदाहरण है कि आठ माह पहले अर्बन इनवायरमेंट एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (यूईईडी) ने कासिम नगर-नरवाल और बावे मोड़ से नरवाल सड़क को सीवरेज लाइन के लिए उखाड़ा था। मगर तारकोल नहीं डाला। यहां तक कि राशि जमा नहीं करवाई। अब लोक निर्माण विभाग फिर से डीपीआर तैयार कर रहा है। इसी तरह बाहु फोर्ट, यूनिवर्सिटी से बावे मोड, यूनिवर्सिटी-विक्रम चौक, बीसी रोड, बस स्टैंड-ज्यूल चौक सड़क में छह से आठ बार तक खोदाई हो चुकी है। हर बार लोक निर्माण विभाग को तारकोल डालना पड़ा।
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लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार काम करने वाले विभाग की जिम्मेदारी होती है कि स्वयं तारकोल बिछाए या फिर विभाग को पैसे दे। जब पैसे मांगते हैं तो बजट खत्म होने का तर्क दिया जाता है। इस कारण अधिकांश सड़कों में तारकोल डालने में समय लग रहा है। मौजूदा समय में यूईईडी, निजी मोबाइल कंपनियां, स्मार्ट सिटी कंपनी, जलशक्ति विभाग समेत अन्य विभाग काम करवा रहे हैं।
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सड़कें कितनी बार खोदाई नुकसान
बाहुफोर्ट-बावे वाली माता रोड छह 70 लाख
कासिम नगर-नरवाल एक 10 लाख
यूनिवर्सिटी -बावे मोड़ चार 30 लाख
यूनिवर्सिटी विक्रमचौक सात एक करोड़ से ज्यादा
बीसी रोड-ज्यूल चौक चार 50 लाख
विक्रम चौक दो 15 लाख


किसी परियोजना में काम शुरू होता है तो प्रावधान होता है कि राशि या फिर खुद विभाग तारकोल डाले। मगर ऐसा नहीं हो रहा। जब भी राशि मांगी जाती है तो बजट खत्म होने का हवाला दिया जाता है। ऐसे में विभाग को ही तारकोल बिछाना पड़ता है।

- केबल सिंह, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग

जो भी काम करवाए हैं, उसकी राशि अदा की गई है। कुछ परियोजना में समस्या आई। बजट खत्म हो गया था। बाद में राशि जारी की गई थी।
- विजय गुप्ता, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग


कई बार परियोजना स्वीकृत होने में काफी समय लग जाता है। देरी से काम शुरू होता है तो बजट कम पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में लोक निर्माण विभाग को ही काम करवाना होता है। अधिकांश सड़कों के लिए राशि जारी की गई है।
- एसके गुप्ता, एक्सईएन, यूईईडी
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