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एसपी की निगरानी में चलेगा सीआरपीएफ का काफिला, पुलवामा हमले के मद्देनजर जारी की नई एसओपी
Mon, 01 Apr 2019 12:09 AM IST
Pranjal Dixit
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 01 Apr 2019 12:09 AM IST
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सीआरपीएफ काफिला
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
कश्मीर घाटी में आवाजाही के दौरान सीआरपीएफ काफिले की कमान अब एसपी रैंक के अधिकारी के पास होगी और एक समय में काफिले में 40 से ज्यादा वाहन शामिल नहीं किए जाएंगे। पुलवामा हमले के मद्देनजर सीआरपीएफ ने यह आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, काफिले में शामिल प्रत्येक वाहन को अनुशासन का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
सीआरपीएफ मुख्यालय ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। एसओपी में जो पहला अहम बदलाव किया गया, वह है जूनियर असिस्टेंट कमांडेंट रैंक (असिस्टेंट एसपी) अधिकारी की जगह सेकेंड इन कमांड रैंक (एसपी रैंक के बराबर) अधिकारी काफिले की अगुवाई करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि काफिले का नेतृत्व एक अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जाए, जिसके पास संवेदनशील कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों और आईईडी खतरों से निपटने की बेहतर रणनीति हो।
नए एसओपी के मुताबिक काफिले का कमांडर सीधे रिपोर्ट करेगा और कश्मीर में सीआरपीएफ के डीआईजी (संचालन) के साथ समन्वय करेगा। अब तक असिस्टेंट कमांडर अपने कमांडेंट के माध्यम से उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट करता था। इसके अलावा, काफिले में वाहनों की संख्या किसी भी सूरत में 40 से ज्यादा नहीं होगी। प्रभावी प्रबंधन और नियंत्रण के लिए हरसंभव कदम उठाया जाएगा कि काफिले में वाहनों की संख्या 10 से 20 ही रहे।
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नियमों का सख्ती से करना होगा पालन
सूत्रों ने बताया कि जवानों का सीटिंग प्लान पर सख्ती से अमल करना होगा। रिफ्रेशमेंट ब्रेक के बाद उन्हें उसी बस या ट्रक में सवार होना होगा, जो उन्हें आवंटित किया गया है। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की होगी।
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सीआरपीएफ मुख्यालय ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। एसओपी में जो पहला अहम बदलाव किया गया, वह है जूनियर असिस्टेंट कमांडेंट रैंक (असिस्टेंट एसपी) अधिकारी की जगह सेकेंड इन कमांड रैंक (एसपी रैंक के बराबर) अधिकारी काफिले की अगुवाई करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि काफिले का नेतृत्व एक अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जाए, जिसके पास संवेदनशील कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों और आईईडी खतरों से निपटने की बेहतर रणनीति हो।
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नए एसओपी के मुताबिक काफिले का कमांडर सीधे रिपोर्ट करेगा और कश्मीर में सीआरपीएफ के डीआईजी (संचालन) के साथ समन्वय करेगा। अब तक असिस्टेंट कमांडर अपने कमांडेंट के माध्यम से उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट करता था। इसके अलावा, काफिले में वाहनों की संख्या किसी भी सूरत में 40 से ज्यादा नहीं होगी। प्रभावी प्रबंधन और नियंत्रण के लिए हरसंभव कदम उठाया जाएगा कि काफिले में वाहनों की संख्या 10 से 20 ही रहे।
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नियमों का सख्ती से करना होगा पालन
सूत्रों ने बताया कि जवानों का सीटिंग प्लान पर सख्ती से अमल करना होगा। रिफ्रेशमेंट ब्रेक के बाद उन्हें उसी बस या ट्रक में सवार होना होगा, जो उन्हें आवंटित किया गया है। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की होगी।
कश्मीर में तैनात हैं 70,000 जवान
सीआरपीएफ के 65 बटालियन में करीब तीन लाख जवान हैं। इनमें से करीब 70,000 जवान कश्मीर घाटी में तैनात हैं। घाटी में कश्मीर और कश्मीर ऑपरेशन दो सेक्टर हैं, जिनका नेतृत्व महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी करते हैं।
पुलवामा हमले के दौरान काफिले में थे 78 वाहन
पुलवामा हमले के दौरान सीआरपीएफ के काफिले में 78 वाहन शामिल थे, जिनमें करीब 2500 जवान सवार थे। जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन आतंकी ने पांचवें नंबर पर चल रही बस को निशाना बनाया। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे।
उधमपुर में ट्रांजिट कैंप
सीआरपीएफ उधमपुर में एक ट्रांजिट कैंप की स्थापना पर भी विचार कर रही है। वर्तमान में जम्मू में ट्रांजिट कैंप है, जहां से श्रीनगर जाने में 10 से12 घंटे लगते हैं। उधमपुर में कैंप की स्थापना के बाद जम्मू से 70 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी।
सीआरपीएफ के 65 बटालियन में करीब तीन लाख जवान हैं। इनमें से करीब 70,000 जवान कश्मीर घाटी में तैनात हैं। घाटी में कश्मीर और कश्मीर ऑपरेशन दो सेक्टर हैं, जिनका नेतृत्व महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी करते हैं।
पुलवामा हमले के दौरान काफिले में थे 78 वाहन
पुलवामा हमले के दौरान सीआरपीएफ के काफिले में 78 वाहन शामिल थे, जिनमें करीब 2500 जवान सवार थे। जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन आतंकी ने पांचवें नंबर पर चल रही बस को निशाना बनाया। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे।
उधमपुर में ट्रांजिट कैंप
सीआरपीएफ उधमपुर में एक ट्रांजिट कैंप की स्थापना पर भी विचार कर रही है। वर्तमान में जम्मू में ट्रांजिट कैंप है, जहां से श्रीनगर जाने में 10 से12 घंटे लगते हैं। उधमपुर में कैंप की स्थापना के बाद जम्मू से 70 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी।