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पहाड़ों की तरफ रवाना होने लगे बक्करवाल
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अखनूर में भेज बकरियां चराता बक्करवाल।
- फोटो : AKHNOOR
अखनूर। मैदानी क्षेत्र से बक्करवाल समुदाय के लोग मवेशियों के साथ कश्मीर घाटी की तरफ रवाना होने लगे हैं। मैदानी क्षेत्रों में बक्करवाल समुदाय के लोग करीब छह माह बिताने के बाद भेड़, बकरियों और घोड़ों सहित पहाड़ी क्षेत्रों में जाना शुरू कर दिया है। सर्दी शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में बक्करवाल सुमदाय के लोग परिवार के सदस्यों सहित मैदानी क्षेत्र में डेरा डाल कर मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध करते हैं।
कश्मीर घाटी में बर्फ पिघलने और पतझड़ खत्म होने पर समुदाय के लोग वापस जाते हैं। खानाबदोश की जिंदगी जीने वाले समुदाय के लोगों की साल में दो बार आवाजाही होती है। अब्दुल हमीद ने बताया कि गर्मी शुरू होते ही कश्मीर के पहाड़ों पर वापसी शुरू हो गई हैं। कंडी क्षेत्र में बक्करवाल समुदाय के लोगों की वापसी शुरू हो गई हैं। उन्होंने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में पहाड़ों से भेड़ बकरियों, घोड़ों सहित अन्य मवेशियों के चारा के लिए बारी-बारी आवाजाही करनी पड़ती है।
मोहम्मद अली ने बताया कि पहाड़ों में जाने के कश्मीर घाटी पर बफ़ॱर पिघलने के साथ हरियाली आ गई है। मवेशियों को चारा आसानी से मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि मैदानी क्षेत्र में गर्मी शुरू होने पर भेड़ बकरियों को तापमान की समस्या पर कश्मीर घाटी में तापमान के साथ चारा मिलना का मुख्य कारण है।
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कश्मीर घाटी में बर्फ पिघलने और पतझड़ खत्म होने पर समुदाय के लोग वापस जाते हैं। खानाबदोश की जिंदगी जीने वाले समुदाय के लोगों की साल में दो बार आवाजाही होती है। अब्दुल हमीद ने बताया कि गर्मी शुरू होते ही कश्मीर के पहाड़ों पर वापसी शुरू हो गई हैं। कंडी क्षेत्र में बक्करवाल समुदाय के लोगों की वापसी शुरू हो गई हैं। उन्होंने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में पहाड़ों से भेड़ बकरियों, घोड़ों सहित अन्य मवेशियों के चारा के लिए बारी-बारी आवाजाही करनी पड़ती है।
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मोहम्मद अली ने बताया कि पहाड़ों में जाने के कश्मीर घाटी पर बफ़ॱर पिघलने के साथ हरियाली आ गई है। मवेशियों को चारा आसानी से मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि मैदानी क्षेत्र में गर्मी शुरू होने पर भेड़ बकरियों को तापमान की समस्या पर कश्मीर घाटी में तापमान के साथ चारा मिलना का मुख्य कारण है।
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