{"_id":"6a8a0d7ed4ef32f0fb07515a","slug":"public-anger-erupts-over-teacher-shortage-in-purmandal-schools-jammu-news-c-398-1-pmd1001-790-2026-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: पुरमंडल के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर फूटा लोगों का गुस्सा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: पुरमंडल के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर फूटा लोगों का गुस्सा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षा विभाग व डायरेक्टर एजुकेशन के खिलाफ प्रदर्शन, जल्द रिक्त पद नहीं भरे गए तो सड़कों पर उतरने की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। शिक्षा जोन के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों में लंबे समय से व्याप्त शिक्षकों की कमी को लेकर शनिवार को स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग और डायरेक्टर स्कूल शिक्षा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में तत्काल अध्यापकों एवं लेक्चररों की नियुक्ति करने की मांग उठाई। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही रिक्त पद नहीं भरे गए तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शन में शामिल गोबिंद राम शर्मा, राजेश कुमार, मुकेश शर्मा, दीपक शर्मा, मूल राज, चरणजीत, सुरेश कुमार, रवि कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि पुरमंडल शिक्षा जोन के कई सरकारी स्कूल वर्षों से शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है और बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल पुरमंडल, मिडिल स्कूल सांगड़, मिडिल स्कूल पुरमंडल, हाई स्कूल कटवालता, मिडिल स्कूल कऊली तथा प्राइमरी स्कूल गैर सहित अनेक विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक और लेक्चरर उपलब्ध नहीं हैं। कई विषयों के अध्यापक न होने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
लोगों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग तथा शहरी सुविधाओं वाले क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के बावजूद अध्यापक आवश्यकता से अधिक तैनात हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की कि सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए तथा ग्रामीण स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो क्षेत्र के लोग अपने बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और प्रशासन की होगी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। शिक्षा जोन के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों में लंबे समय से व्याप्त शिक्षकों की कमी को लेकर शनिवार को स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग और डायरेक्टर स्कूल शिक्षा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में तत्काल अध्यापकों एवं लेक्चररों की नियुक्ति करने की मांग उठाई। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही रिक्त पद नहीं भरे गए तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शन में शामिल गोबिंद राम शर्मा, राजेश कुमार, मुकेश शर्मा, दीपक शर्मा, मूल राज, चरणजीत, सुरेश कुमार, रवि कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि पुरमंडल शिक्षा जोन के कई सरकारी स्कूल वर्षों से शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है और बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों के अनुसार गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल पुरमंडल, मिडिल स्कूल सांगड़, मिडिल स्कूल पुरमंडल, हाई स्कूल कटवालता, मिडिल स्कूल कऊली तथा प्राइमरी स्कूल गैर सहित अनेक विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक और लेक्चरर उपलब्ध नहीं हैं। कई विषयों के अध्यापक न होने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
लोगों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग तथा शहरी सुविधाओं वाले क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के बावजूद अध्यापक आवश्यकता से अधिक तैनात हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की कि सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए तथा ग्रामीण स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो क्षेत्र के लोग अपने बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और प्रशासन की होगी।