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प्रदर्शन कर डलवास के लोगों ने मांगा मुआवजा
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रामबन। करीब छह महीने पहले वैकल्पिक मार्ग के निर्माण के लिए दी गई जमीन का मुआवजा नहीं मिलने से नाराज डलवास के लोगों ने मंगलवार दोपहर को नेशनल हाइवे अथारिटी के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छह महीने से मुआवजे की मांग को लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
राजमार्ग के भूस्खलन का शिकार होने पर जब दोपहर के समय नेशनल हाइवे अथारिटी की मशीनरी काम करने के लिए डलवास में पहुंची तो लोगों ने काम का विरोध कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि करीब छह महीने पहले मार्च में भी इस स्थान पर राजमार्ग भूस्खलन का शिकार हुआ था। राजमार्ग बंद होने पर नेशनल हाइवे अथारिटी ने वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए उनकी जमीनी लेने की बात कही और आश्वासन दिया कि इसका पूरा मुआवजा दिया जाएगा।
उन्होंने भी लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अपनी जमीन वैकल्पिक मार्ग के निर्माण के लिए जमीन दे दी। लेकिन वैकल्पिक मार्ग बनने के बाद नेशनल हाइवे अथारिटी ने इसको लेकर कुछ नहीं किया। स्थानीय निवासी लगातार जमीन के मुआवजे को लेकर प्रशासन और नेशनल हाइवे अथारिटी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। जब तक उनको मुआवजा नहीं मिल जाता है वह काम नहीं शुरू होने देंगे। जिला प्रशासन को जब लोगों के प्रदर्शन की सूचना मिली तो कुछ अधिकारियों को मौके पर भेज दिया गया और अधिकारियों ने आश्वासन देकर प्रदर्शन बंद करवाया।
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राजमार्ग के भूस्खलन का शिकार होने पर जब दोपहर के समय नेशनल हाइवे अथारिटी की मशीनरी काम करने के लिए डलवास में पहुंची तो लोगों ने काम का विरोध कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि करीब छह महीने पहले मार्च में भी इस स्थान पर राजमार्ग भूस्खलन का शिकार हुआ था। राजमार्ग बंद होने पर नेशनल हाइवे अथारिटी ने वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए उनकी जमीनी लेने की बात कही और आश्वासन दिया कि इसका पूरा मुआवजा दिया जाएगा।
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उन्होंने भी लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अपनी जमीन वैकल्पिक मार्ग के निर्माण के लिए जमीन दे दी। लेकिन वैकल्पिक मार्ग बनने के बाद नेशनल हाइवे अथारिटी ने इसको लेकर कुछ नहीं किया। स्थानीय निवासी लगातार जमीन के मुआवजे को लेकर प्रशासन और नेशनल हाइवे अथारिटी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। जब तक उनको मुआवजा नहीं मिल जाता है वह काम नहीं शुरू होने देंगे। जिला प्रशासन को जब लोगों के प्रदर्शन की सूचना मिली तो कुछ अधिकारियों को मौके पर भेज दिया गया और अधिकारियों ने आश्वासन देकर प्रदर्शन बंद करवाया।
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