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Jammu News: पंजाब से जम्मू तक गूंजी पंजाबी की आवाज मोर्चे को किसान संगठनों का भी मिला साथ
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अन्नदाता किसान यूनियन पंजाब ने पंजाबी भाषा मोर्चा को अपना समर्थन दिया। स्रोत : संवाद।
- फोटो : Samvad
- छठे दिन अन्नदाता किसान यूनियन पंजाब समेत कई संगठनों ने दिया समर्थन, शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव लाने की मांग
- जम्मू मोर्चे में शामिल होंगे पंजाब व अन्य राज्यों से जत्थे, पीएम, मुख्यमंत्रियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाएंगे मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-मोर्चा मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा। आंदोलन को पंजाब के किसान संगठनों, गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों, धार्मिक-सामाजिक संगठनों और विभिन्न जिलों की समितियों का समर्थन मिलने से इसका दायरा बढ़ता दिखाई दिया।
गुरुद्वारा रानी तालाब डिग्याना के चेयरमैन तरनजीत सिंह टोनी ने कहा कि विभिन्न वर्गों से मिल रहा समर्थन इस मांग को व्यापक आधार दे रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रिमंडल और सभी 90 विधायकों से आगामी शीतकालीन सत्र में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की।
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अन्नदाता किसान यूनियन पंजाब का समर्थन
अन्नदाता किसान यूनियन पंजाब के अध्यक्ष अंग्रेज सिंह संधू के नेतृत्व में किसान प्रतिनिधियों ने मोर्चे को समर्थन दिया। संधू ने कहा कि पंजाबी को आधिकारिक मान्यता देने की मांग भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा लोकतांत्रिक मुद्दा है। पंजाब से किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी से यह संदेश गया है कि यह मांग जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है। सिख समुदाय के प्रतिनिधियों के अलावा रियासी और सांबा की जिला समितियों ने भी समर्थन पत्र सौंपे। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, बोर कैंप और बरजल्ला, रायपुर सतवारी ने भी पंजाबी को आधिकारिक दर्जा देने की मांग का समर्थन किया।
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ऑल जेएंडके दलित चेतना मंच, ऑल जम्मू-कश्मीर श्री गुरु रविदास सभा, कृष्णा नगर तथा श्री माता वैष्णो देवी ई-रिक्शा ई-ऑटो यूनियन ने भी लिखित समर्थन दिया। टोनी ने बताया कि अब पंजाब और देश के अन्य हिस्सों से जत्थे व प्रतिनिधिमंडल जम्मू मोर्चे में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। आयोजक प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विधायकों तक भी मांग पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।
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हर दिन लंगर, शाम को पाठ-गुरबाणी
धरने में शामिल लोगों के लिए विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों की ओर से लंगर सेवा की जा रही है। भोजन के साथ पानी और जूस भी उपलब्ध कराया जा रहा है। शाम के समय पाठ और गुरबाणी का आयोजन होता है। आयोजकों का कहना है कि सेवा और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मोर्चा शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। मोर्चे में सिख समुदाय, गुरुद्वारा प्रतिनिधि, किसान, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्वान और विभिन्न सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजकों ने समर्थकों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखने की अपील की।
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- जम्मू मोर्चे में शामिल होंगे पंजाब व अन्य राज्यों से जत्थे, पीएम, मुख्यमंत्रियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाएंगे मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-मोर्चा मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा। आंदोलन को पंजाब के किसान संगठनों, गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों, धार्मिक-सामाजिक संगठनों और विभिन्न जिलों की समितियों का समर्थन मिलने से इसका दायरा बढ़ता दिखाई दिया।
गुरुद्वारा रानी तालाब डिग्याना के चेयरमैन तरनजीत सिंह टोनी ने कहा कि विभिन्न वर्गों से मिल रहा समर्थन इस मांग को व्यापक आधार दे रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रिमंडल और सभी 90 विधायकों से आगामी शीतकालीन सत्र में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की।
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अन्नदाता किसान यूनियन पंजाब का समर्थन
अन्नदाता किसान यूनियन पंजाब के अध्यक्ष अंग्रेज सिंह संधू के नेतृत्व में किसान प्रतिनिधियों ने मोर्चे को समर्थन दिया। संधू ने कहा कि पंजाबी को आधिकारिक मान्यता देने की मांग भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा लोकतांत्रिक मुद्दा है। पंजाब से किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी से यह संदेश गया है कि यह मांग जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है। सिख समुदाय के प्रतिनिधियों के अलावा रियासी और सांबा की जिला समितियों ने भी समर्थन पत्र सौंपे। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, बोर कैंप और बरजल्ला, रायपुर सतवारी ने भी पंजाबी को आधिकारिक दर्जा देने की मांग का समर्थन किया।
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ऑल जेएंडके दलित चेतना मंच, ऑल जम्मू-कश्मीर श्री गुरु रविदास सभा, कृष्णा नगर तथा श्री माता वैष्णो देवी ई-रिक्शा ई-ऑटो यूनियन ने भी लिखित समर्थन दिया। टोनी ने बताया कि अब पंजाब और देश के अन्य हिस्सों से जत्थे व प्रतिनिधिमंडल जम्मू मोर्चे में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। आयोजक प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विधायकों तक भी मांग पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।
हर दिन लंगर, शाम को पाठ-गुरबाणी
धरने में शामिल लोगों के लिए विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों की ओर से लंगर सेवा की जा रही है। भोजन के साथ पानी और जूस भी उपलब्ध कराया जा रहा है। शाम के समय पाठ और गुरबाणी का आयोजन होता है। आयोजकों का कहना है कि सेवा और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मोर्चा शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। मोर्चे में सिख समुदाय, गुरुद्वारा प्रतिनिधि, किसान, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्वान और विभिन्न सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजकों ने समर्थकों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखने की अपील की।