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नौकरी मांग रहे पैरा मेडिकल कर्मियों की पुलिस से धक्कामुक्की, कई हिरासत में लिए
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जम्मू। एनएचएम के तहत इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज पर नियुक्त अनुबंधित पैरा मेडिकल कर्मियों ने सेवा विस्तार के लिए वीरवार को दूसरे दिन भी जीएमसी के बाहर धरना जारी रखा। बुधवार देर रात से ही धरने पर बैठे कर्मियों ने जीएमसी के गेट के बाहर सड़क जाम कर बर्तन खड़काकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने के लिए भारी पुलिस बल बुलाया गया। इस दौरान पुलिस के साथ पैरा मेडिकल कर्मियों की धक्कामुक्की हुई। पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। स्वास्थ्य कर्मियों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ने उनके साथ जबरदस्ती की और कई साथियों को हिरासत में लिया, जिन्हें दोपहर बाद छोड़ा गया। वीरवार रात तक कर्मी धरने पर बैठे थे।
जीएमसी प्रशासन की ओर से बुधवार को अनुबंध पर रखे कर्मियों की सेवाएं एक अक्तूबर से समाप्त करने का आदेश दिया। इसके बाद स्टाफ ने काम छोड़कर धरना शुरू कर दिया। बुधवार रात जीएमसी के मुख्य गेट पर धरना देकर रास्ता बंद कर दिया, रात भर कर्मी वहीं पर बैठे रहे। वीरवार सुबह अन्य कर्मी भी धरने में शामिल हो गए और जीएमसी के बाहर मुख्य सड़क पर यातायात जाम कर दिया। आरोप लगाया कि पुलिस ने पंजाब सिंह सहित अन्य दो कर्मियों को हिरासत में लिया, जिसमें एक तीन माह की गर्भवती भी थी।
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हिरासत में लेने पर पुलिस
वाहन के आगे लेट गए कर्मी
पुलिस ने जब एक कर्मी को हिरासत में लेने की कोशिश की तो वह वाहन के नीचे चला गया और उसके साथी हिरासत में लेने का विरोध करते रहे। इसी तरह जब महिला कर्मी को पकड़कर पुलिस वाहन में बिठाया गया तो कई महिला कर्मी वाहन के आगे लेटकर विरोध करने लगीं। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद वाहन को बाहर निकाला। इसके बाद भी कर्मी मुख्य सड़क पर डटे रहे और साथियों को छोड़ने की मांग की। शाम को हिरासत में लिए कर्मियों को पुलिस ने छोड़ दिया। आरोप लगाया कि पुलिस ने मारपीट की और महिला कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया।
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1600 अनुबंध कर्मियों की
सेवाएं समाप्त की गई हैं
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कोविड के दौरान उन्होंने चौबीस घंटे अस्पतालों में ड्यूटी देकर मानव जीवन बचाने का काम किया। लेकिन अब अचानक उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दे दिया गया है। सरकार बेरोजगारी बढ़ाने का काम कर रही है। देश के कई राज्यों में अनुबंध कर्मियों का सेवा विस्तार किया गया है। कर्मियों ने आरोप लगाया कि आदेश मिलने पर वे जीएमसी की प्रिंसिपल, अधीक्षक से मिलने गए, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। इस बीच जिला प्रशासन से कुछ अधिकारियों ने धरनास्थल पर पहुंचकर कर्मियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। बताया जाता है कि ऐसे 1600 कर्मियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। रात तक जीएमसी के बाहर अनुबंध कर्मी धरने पर बैठे हुए थे। पुलिस अधिकारियों की ओर से उन्हें जीएमसी के अधिकारियों से बात करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन वे बात मानने को तैयार नहीं हुए।
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सरकार के आदेश के मुताबिक अनुबंध पैरा मेडिकल कर्मियों की सेवाएं 30 सितंबर से समाप्त की गई हैं और इनके विस्तार का कोई आदेश अभी तक नहीं मिला है।
डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
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मिशन स्टेट हुड और कांग्रेस समर्थन में आई
उधर, मिशन स्टेट हुड के अध्यक्ष सुनील डिंपल ने भी पैरा मेडिकल कर्मियों के प्रदर्शन में शामिल होकर समर्थन दिया। कहा कि जब प्रदेश में कोविड की तीसरी लहर दस्तक दे रही है तब इनको निकालने का क्या औचित्य है। ये स्वास्थ्य कर्मी जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों से हैं। सरकार ने इनकी सेवाओं का भुगतान भी नहीं किया है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रमण भल्ला ने भी पैरा मेडिकल कर्मियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। कहा कि सरकार बेरोजगारी बढ़ाने का काम कर रही है।
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जीएमसी प्रशासन की ओर से बुधवार को अनुबंध पर रखे कर्मियों की सेवाएं एक अक्तूबर से समाप्त करने का आदेश दिया। इसके बाद स्टाफ ने काम छोड़कर धरना शुरू कर दिया। बुधवार रात जीएमसी के मुख्य गेट पर धरना देकर रास्ता बंद कर दिया, रात भर कर्मी वहीं पर बैठे रहे। वीरवार सुबह अन्य कर्मी भी धरने में शामिल हो गए और जीएमसी के बाहर मुख्य सड़क पर यातायात जाम कर दिया। आरोप लगाया कि पुलिस ने पंजाब सिंह सहित अन्य दो कर्मियों को हिरासत में लिया, जिसमें एक तीन माह की गर्भवती भी थी।
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हिरासत में लेने पर पुलिस
वाहन के आगे लेट गए कर्मी
पुलिस ने जब एक कर्मी को हिरासत में लेने की कोशिश की तो वह वाहन के नीचे चला गया और उसके साथी हिरासत में लेने का विरोध करते रहे। इसी तरह जब महिला कर्मी को पकड़कर पुलिस वाहन में बिठाया गया तो कई महिला कर्मी वाहन के आगे लेटकर विरोध करने लगीं। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद वाहन को बाहर निकाला। इसके बाद भी कर्मी मुख्य सड़क पर डटे रहे और साथियों को छोड़ने की मांग की। शाम को हिरासत में लिए कर्मियों को पुलिस ने छोड़ दिया। आरोप लगाया कि पुलिस ने मारपीट की और महिला कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया।
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1600 अनुबंध कर्मियों की
सेवाएं समाप्त की गई हैं
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कोविड के दौरान उन्होंने चौबीस घंटे अस्पतालों में ड्यूटी देकर मानव जीवन बचाने का काम किया। लेकिन अब अचानक उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दे दिया गया है। सरकार बेरोजगारी बढ़ाने का काम कर रही है। देश के कई राज्यों में अनुबंध कर्मियों का सेवा विस्तार किया गया है। कर्मियों ने आरोप लगाया कि आदेश मिलने पर वे जीएमसी की प्रिंसिपल, अधीक्षक से मिलने गए, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। इस बीच जिला प्रशासन से कुछ अधिकारियों ने धरनास्थल पर पहुंचकर कर्मियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। बताया जाता है कि ऐसे 1600 कर्मियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। रात तक जीएमसी के बाहर अनुबंध कर्मी धरने पर बैठे हुए थे। पुलिस अधिकारियों की ओर से उन्हें जीएमसी के अधिकारियों से बात करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन वे बात मानने को तैयार नहीं हुए।
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सरकार के आदेश के मुताबिक अनुबंध पैरा मेडिकल कर्मियों की सेवाएं 30 सितंबर से समाप्त की गई हैं और इनके विस्तार का कोई आदेश अभी तक नहीं मिला है।
डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
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मिशन स्टेट हुड और कांग्रेस समर्थन में आई
उधर, मिशन स्टेट हुड के अध्यक्ष सुनील डिंपल ने भी पैरा मेडिकल कर्मियों के प्रदर्शन में शामिल होकर समर्थन दिया। कहा कि जब प्रदेश में कोविड की तीसरी लहर दस्तक दे रही है तब इनको निकालने का क्या औचित्य है। ये स्वास्थ्य कर्मी जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों से हैं। सरकार ने इनकी सेवाओं का भुगतान भी नहीं किया है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रमण भल्ला ने भी पैरा मेडिकल कर्मियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। कहा कि सरकार बेरोजगारी बढ़ाने का काम कर रही है।