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लक्षित हत्याओं के खिलाफ काली पट्टी बांध सड़कों पर उतरे कश्मीरी पंडित कर्मी
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जम्मू। घाटी में मंगलवार को कश्मीरी पंडित सुनील कुमार की हत्या के बाद पीएम पैकेज के तहत तैनात कर्मियों में रोष है। उन्होंने बुधवार को हत्या के विरोध और पीएम पैकेज के तहत कर्मचारियों का जम्मू में स्थानांतरण की मांग को लेकर काली पट्टी बांध कर प्रदर्शन किया। साथ ही राहत आयुक्त कार्यालय से तवी पुल तक विरोध रैली निकाली। आधा घंटा तवी पुल को जाम कर विरोध जताया। पुलिस-कर्मियों में मामूली झड़प भी हुई।
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने कहा कि घाटी में लक्षित हत्याओं के शिकार हो रहे हैं। सरकार हमारा स्थानांतरण जम्मू संभाग में करे और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दे। शोपियां में आतंकियों ने जिस सुनील कुमार की हत्या की है उन्होंने कभी घाटी नहीं छोड़ी थी। उन्हें कश्मीर में भारत का झंडा उठाने की सजा मिली है। आतंकवादी नहीं चाहते कश्मीर में कोई अल्पसंख्यक रहे। राहत आयुक्त कार्यालय से शुरू हुई रैली जैसी ही तवी पुल पर पहुंची तो पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने पुल को जाम कर आवाज बुलंद की। पुलिस और प्रदर्शन कर्मचारियों के बीच झंडप भी हुई। कर्मचारियों ने कहा कि हमारी एक ही मांग है कि स्थानांतरण जम्मू संभाग में हो। 12 साल से घाटी में सेवाएं दे रहे हैं, जिस कारण जमीनी हकीकत की जानकारी है।
हर बार टूट जाती है घर वापसी की उम्मीद
कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याएं घर वापसी की उम्मीद को तोड़ रही हैं। सरकार पंडितों की सुरक्षित घर वापसी का दावा करती है, लेकिन आए दिन पंडितों की लक्षित हत्याएं दावों की पोल भी खोल रही हैं। कश्मीरी पंडितों ने कहा कि 30 सालों से विस्थापन का दंश झेल रहे है। अपने ही देश में शरणार्थी बने हैं।
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चार माह से जिस बात को उठा रहे थे वही हुआ है। एक और कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी गई है। पीएम पैकेज के तहत नियुक्ति कर्मचारियों का जम्मू में स्थानांतरण किया जाए। कश्मीरी पंडित कर्मचारी व आम लोग घाटी में सुरक्षित नहीं है। सरकार कोई ठोस नीति बनाए।
- रजत भट, कर्मचारी, पीएम पैकेज
एक और कश्मीरी पंडित आतंकियों की गोलियों और सरकारी की गलत नीतियों का शिकार हुआ। घाटी कश्मीरी पंडितों के लिए सुरक्षित नहीं है। सुनील कुमार ने आतंक के उस दौर में घाटी नहीं छोड़ी थी, लेकिन आज उन्हें घाटी में रहने की सजा मिली। पीएम पैकेज के कर्मचारियों का स्थानांतरण जम्मू संभाग में किया जाए।
- अमित कौल, कर्मचारी, पीएम पैकेज
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कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने कहा कि घाटी में लक्षित हत्याओं के शिकार हो रहे हैं। सरकार हमारा स्थानांतरण जम्मू संभाग में करे और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दे। शोपियां में आतंकियों ने जिस सुनील कुमार की हत्या की है उन्होंने कभी घाटी नहीं छोड़ी थी। उन्हें कश्मीर में भारत का झंडा उठाने की सजा मिली है। आतंकवादी नहीं चाहते कश्मीर में कोई अल्पसंख्यक रहे। राहत आयुक्त कार्यालय से शुरू हुई रैली जैसी ही तवी पुल पर पहुंची तो पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने पुल को जाम कर आवाज बुलंद की। पुलिस और प्रदर्शन कर्मचारियों के बीच झंडप भी हुई। कर्मचारियों ने कहा कि हमारी एक ही मांग है कि स्थानांतरण जम्मू संभाग में हो। 12 साल से घाटी में सेवाएं दे रहे हैं, जिस कारण जमीनी हकीकत की जानकारी है।
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हर बार टूट जाती है घर वापसी की उम्मीद
कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याएं घर वापसी की उम्मीद को तोड़ रही हैं। सरकार पंडितों की सुरक्षित घर वापसी का दावा करती है, लेकिन आए दिन पंडितों की लक्षित हत्याएं दावों की पोल भी खोल रही हैं। कश्मीरी पंडितों ने कहा कि 30 सालों से विस्थापन का दंश झेल रहे है। अपने ही देश में शरणार्थी बने हैं।
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चार माह से जिस बात को उठा रहे थे वही हुआ है। एक और कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी गई है। पीएम पैकेज के तहत नियुक्ति कर्मचारियों का जम्मू में स्थानांतरण किया जाए। कश्मीरी पंडित कर्मचारी व आम लोग घाटी में सुरक्षित नहीं है। सरकार कोई ठोस नीति बनाए।
- रजत भट, कर्मचारी, पीएम पैकेज
एक और कश्मीरी पंडित आतंकियों की गोलियों और सरकारी की गलत नीतियों का शिकार हुआ। घाटी कश्मीरी पंडितों के लिए सुरक्षित नहीं है। सुनील कुमार ने आतंक के उस दौर में घाटी नहीं छोड़ी थी, लेकिन आज उन्हें घाटी में रहने की सजा मिली। पीएम पैकेज के कर्मचारियों का स्थानांतरण जम्मू संभाग में किया जाए।
- अमित कौल, कर्मचारी, पीएम पैकेज