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आशा वर्करों ने स्वास्थ्य निदेशालय पर किया प्रदर्शन
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जम्मू। पारिश्रमिक और अन्य मांगों के लिए आशा वर्करों (एनएचएम) ने मंगलवार को आशा वर्कर यूनियन जम्मू और सीटू के बैनर तले स्वास्थ्य निदेशालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी वर्करों ने निदेशालय से इंदिरा चौक तक रैली निकाली। वर्करों ने कहा कि कोविड और अन्य दूसरी स्वास्थ्य गतिविधियों में आशा वर्कर रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रही हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने 24 सितंबर को देश व्यापी काम छोड़ो हड़ताल में भी शामिल होने की घोषणा की।
प्रदेश समिति सीटू के महासचिव ओम प्रकाश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग में करीब 14 हजार आशा वर्करों की सेवाएं ली जा रही हैं। इस दौरान अपनी ड्यूटी का निर्वाह करते हुए कई आशा वर्करों की मौत हुई। 45वें और 46वें इंडियन लेबर कान्फ्रेंस की सिफारिशों के तहत कर्मियों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन सुविधा प्रावधान करने का प्रावधान है। लेकिन केंद्र सरकार इसके लेकर गंभीर नहीं है।
आशा वर्कर यूनियन की सचिव अनिता राजपूत ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में आशा को दस हजार से अधिक पारिश्रमिक दिया जा रहा है। लेकिन जम्मू-कश्मीर में वर्करों को सिर्फ मासिक दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। आशा वर्करों की 24 घंटे सेवाएं ली जा रही हैं। आशा वर्करों की दैनिक आधार पर 8-9 घंटे टीकाकरण में सेवाएं ली जा रही हैं।
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आशा वर्करों ने आपात औ्र गंभीर परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान दिया है। उन्होंने आशा वर्करों को न्यूनतम वेतन में 21 हजार देने, सामाजिक सुरक्षा में ईपीएफ, ईएसआई और निशुल्क चिकित्सा सुविधाएं देने की मांग की। यूनियन नेता सुनीता भगत ने कहा कि वर्करों की ओर से पहले से दिए ज्ञापन में न्यूनतम वेतन बढ़ाने, हर वर्ष 1000 वेतन बढ़ाने, कोविड टीकाकरण के प्रोत्साहन अभियान के लिए प्रतिदिन 300 रुपये देने, कोविड प्रबंधन में ड्यूटी के लिए प्रतिदिन दिन 500 रुपये भत्ता देना, कोविड के दौरान मौत पर परिवारवालों को 50 लाख रुपये मुआवजा देना, 50 लाख बीमा कवर देना शामिल है। प्रदर्शन में सीटू से मुजफ्फर वानी, जिया लाल परिहार, जगदीश शर्मा, गीता देवी, वैष्णो, गीता आदि शामिल रहे।
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प्रदेश समिति सीटू के महासचिव ओम प्रकाश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग में करीब 14 हजार आशा वर्करों की सेवाएं ली जा रही हैं। इस दौरान अपनी ड्यूटी का निर्वाह करते हुए कई आशा वर्करों की मौत हुई। 45वें और 46वें इंडियन लेबर कान्फ्रेंस की सिफारिशों के तहत कर्मियों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन सुविधा प्रावधान करने का प्रावधान है। लेकिन केंद्र सरकार इसके लेकर गंभीर नहीं है।
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आशा वर्कर यूनियन की सचिव अनिता राजपूत ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में आशा को दस हजार से अधिक पारिश्रमिक दिया जा रहा है। लेकिन जम्मू-कश्मीर में वर्करों को सिर्फ मासिक दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। आशा वर्करों की 24 घंटे सेवाएं ली जा रही हैं। आशा वर्करों की दैनिक आधार पर 8-9 घंटे टीकाकरण में सेवाएं ली जा रही हैं।
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आशा वर्करों ने आपात औ्र गंभीर परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान दिया है। उन्होंने आशा वर्करों को न्यूनतम वेतन में 21 हजार देने, सामाजिक सुरक्षा में ईपीएफ, ईएसआई और निशुल्क चिकित्सा सुविधाएं देने की मांग की। यूनियन नेता सुनीता भगत ने कहा कि वर्करों की ओर से पहले से दिए ज्ञापन में न्यूनतम वेतन बढ़ाने, हर वर्ष 1000 वेतन बढ़ाने, कोविड टीकाकरण के प्रोत्साहन अभियान के लिए प्रतिदिन 300 रुपये देने, कोविड प्रबंधन में ड्यूटी के लिए प्रतिदिन दिन 500 रुपये भत्ता देना, कोविड के दौरान मौत पर परिवारवालों को 50 लाख रुपये मुआवजा देना, 50 लाख बीमा कवर देना शामिल है। प्रदर्शन में सीटू से मुजफ्फर वानी, जिया लाल परिहार, जगदीश शर्मा, गीता देवी, वैष्णो, गीता आदि शामिल रहे।