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यात्री किराया बढ़ाने को तैयार नहीं सरकार, आंदोलन करेंगे ट्रांसपोर्टर
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जम्मू। ट्रांसपोर्टरों की ओर से पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई बंद करने और हड़ताल पर जाने के अल्टीमेटम के बावजूद सरकार यात्री किराया बढ़ाने को तैयार नहीं है। दूसरी तरफ मांग पर अड़े ट्रांसपोर्टर आंदोलन की तैयारी में हैं। सरकार महामारी के बीच रोजगार के संकट से जूझ रहे आम लोगों पर महंगाई का बोझ नहीं डालना चाहती है। ट्रांसपोर्टरों की यात्री किराया बढ़ाने की मांग पर सरकार ने फिलहाल अनौपचारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है, लेकिन ट्रांसपोर्टर बिना किराया बढ़ाए परिवहन सेवा शुरू करने को तैयार नहीं हैं। 10 जून तक यात्री किराया बढ़ाने के आश्वासन के बावजूद सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।
जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष टीएस वजीर ने कहा कि सरकार का रवैया निराशाजनक है। सरकार ट्रांसपोर्टरों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक उनकी गाड़ियां सड़कों पर नहीं चलेंगी। लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्टरों की स्थिति काफी खराब हो गई है। जम्मू-कश्मीर पर्यटन प्रदेश है, ऐसे में यहां पर अधिकांश सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह पर्यटकों पर निर्भर है। प्रदेश में अगस्त, 2019 से ट्रांसपोर्टरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मांगें नहीं मानती है तो मजबूरन आंदोलन करना पडे़गा। वजीर ने कहा कि सरकार ने आश्वासन के बावजूद मांगों को पूरा नहीं किया है। अब ट्रांसपोर्टर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सरकार के खिलाफ अगली रणनीति बनने के लिए ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने कई बार बैठकें की हैं। सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ ट्रांसपोर्ट पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति ठप करने की तैयारी में है।
मांग पर बढ़ाई जाएगी एसआरटीसी बसों की संख्या
ट्रांसपोर्ट विभाग के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि इस समय हमारी प्राथमिकता आम लोग हैं। कोरोना संकट ने पहले ही लोगों का रोजगार छीन लिया है। ऐसे समय में जनता पर महंगाई का बोझ डालना उचित नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना के डर से सार्वजनिक परिवहन सेवा का कम से कम उपयोग हो रहा है। सरकार द्वारा शुरू की गई सिटी और अंतर जिला बस सेवा में लोग कम सफर कर रहे हैं। हालांकि इन बसों को लगातार सैनिटाइज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सार्वजनिक परिवहन सेवा को लेकर मांग बढ़ती है तो सरकार जेके एसआरटीसी बसों में वृद्धि करेगी। अगर सरकार अभी कोरोना को देखते हुए यात्री किराये में बढ़ोतरी करती है तो भविष्य में ट्रांसपोर्टर इन दरों को जारी रखने की मांग भी करेेंगे। ऐसे में सरकार फिलहाल इसको लेकर गंभीर नहीं है।
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जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष टीएस वजीर ने कहा कि सरकार का रवैया निराशाजनक है। सरकार ट्रांसपोर्टरों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक उनकी गाड़ियां सड़कों पर नहीं चलेंगी। लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्टरों की स्थिति काफी खराब हो गई है। जम्मू-कश्मीर पर्यटन प्रदेश है, ऐसे में यहां पर अधिकांश सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह पर्यटकों पर निर्भर है। प्रदेश में अगस्त, 2019 से ट्रांसपोर्टरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मांगें नहीं मानती है तो मजबूरन आंदोलन करना पडे़गा। वजीर ने कहा कि सरकार ने आश्वासन के बावजूद मांगों को पूरा नहीं किया है। अब ट्रांसपोर्टर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सरकार के खिलाफ अगली रणनीति बनने के लिए ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने कई बार बैठकें की हैं। सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ ट्रांसपोर्ट पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति ठप करने की तैयारी में है।
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मांग पर बढ़ाई जाएगी एसआरटीसी बसों की संख्या
ट्रांसपोर्ट विभाग के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि इस समय हमारी प्राथमिकता आम लोग हैं। कोरोना संकट ने पहले ही लोगों का रोजगार छीन लिया है। ऐसे समय में जनता पर महंगाई का बोझ डालना उचित नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना के डर से सार्वजनिक परिवहन सेवा का कम से कम उपयोग हो रहा है। सरकार द्वारा शुरू की गई सिटी और अंतर जिला बस सेवा में लोग कम सफर कर रहे हैं। हालांकि इन बसों को लगातार सैनिटाइज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सार्वजनिक परिवहन सेवा को लेकर मांग बढ़ती है तो सरकार जेके एसआरटीसी बसों में वृद्धि करेगी। अगर सरकार अभी कोरोना को देखते हुए यात्री किराये में बढ़ोतरी करती है तो भविष्य में ट्रांसपोर्टर इन दरों को जारी रखने की मांग भी करेेंगे। ऐसे में सरकार फिलहाल इसको लेकर गंभीर नहीं है।
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