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जीपीएस और पैनिक बटन लगवाने पर जोर, निगरानी वाले सर्वर ठंडे बस्ते में
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में कामर्शियल वाहनों में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीपीएस और पैनिक बटन लगाने का आदेश अब मजाक बनकर रह गया है। सरकार ट्रांसपोर्टरों पर वाहनों में जीपीएस और पैनिक बटन लगाने पर दबाव तो बना रही है, लेकिन इसे निगरानी करने वाले सेंट्रल सर्वर का अभी तक कोई पता नहीं है। तीन साल से सर्वर तैयार करने की बात कही जा रहा है, लेकिन जमीनी पर अभी कुछ नहीं है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के आदेश के बाद एक अप्रैल, 2019 से पंजीकृत होने वाले कामर्शियल वाहनों में पैनिक बटन अनिवार्य कर दिया था। हालांकि उस समय प्रदेश में यह कवायद परवान नहीं चढ़ पाई, लेकिन अब परिवहन विभाग बिना जीपीएस और पैनिक बटन वाले वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दे रहा है। जिन वाहनों में यह सिस्टम लगा उन्हें ही फिटनेस दी जा रहा है, फिर चाहे सिस्टम का लाभ यात्रियों को मिले या नहीं मिले। बिना जीपीएस और पैनिक बटन वाले वाहनों का फिटनेस नहीं की जा रही है। इसमें कुछ वाहन तो ऐसे भी है, जिनमें सिस्टम तो लगा है, लेकिन सर्किय नहीं होने से उनकी फिटनेस ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाई है। इसका कारण सर्वर का तैयार नहीं होना है। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि परिवहन विभाग वाहन मालिकों पर सिर्फ जीपीएस और पैनिक बटन लगवाने का ही दबाव बना रहा है।
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बिना सर्वर के जीपीएस
का कोई मतलब नहीं
ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्टर यूनियन के अध्यक्ष विजय कुमार चिब ने कहा कि हम पैनिक बटन और जीपीएस लगाने के खिलाफ नहीं हैं। सरकार पहले इसके लिए सर्वर तैयार करे। बिना सर्वर के वाहनों में जीपीएस लगाने का कोई लाभ नहीं है। विभाग ने वेंडर को जीपीएस और पैनिक बटन लगाने के लिए पंजीकृत तो किया है, लेकिन इसके दाम तय नहीं किए हैं। ट्रांसपोर्टरों को 10 से 12 हजार रुपये में सिस्टम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच लाख के करीब ऐसे वाहन हैं, जिनमें पैनिक बटन और जीपीएस सिस्टम लगाया जाना है। बीते 15 दिनों से बिना जीपीएस और पैनिक बटन वाले वाहनों का पंजीकरण नहीं हो रहा है।
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15 दिन से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं हुआ ऑनलाइन
वाहन चालक बशीर अहमद ने बताया कि विभाग के कहने पर चार अगस्त को उन्होंने जीपीएस और पैनिक बटन लगवाया और पांच को वाहन को फिटनेस पास करवाया, लेकिन 15 दिनों से विभाग फिटनेस सर्टिफिकेट को ऑनलाइन नहीं कर पाया है, जिसके कारण वह वाहन का परिचालन नहीं कर पा रहे हैं। बिना सर्वर तैयार किए ही वाहन चालकों को सिस्टम लगवाने को कहा जा रहा है। इसके लिए सरकार ने कोई दाम भी तय नहीं किए हैं।
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आरटीओ बोले सिस्टम इंस्टॉल करना है
जीपीएस और पैनिक बटन को इंस्टॉल करना है, लेकिन इसको चालू करने में अभी और समय लगेगा। बिना जीपीएस और पैनिक बटन के वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।
- घनशाम सिंह, आरटीओ जम्मू
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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के आदेश के बाद एक अप्रैल, 2019 से पंजीकृत होने वाले कामर्शियल वाहनों में पैनिक बटन अनिवार्य कर दिया था। हालांकि उस समय प्रदेश में यह कवायद परवान नहीं चढ़ पाई, लेकिन अब परिवहन विभाग बिना जीपीएस और पैनिक बटन वाले वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दे रहा है। जिन वाहनों में यह सिस्टम लगा उन्हें ही फिटनेस दी जा रहा है, फिर चाहे सिस्टम का लाभ यात्रियों को मिले या नहीं मिले। बिना जीपीएस और पैनिक बटन वाले वाहनों का फिटनेस नहीं की जा रही है। इसमें कुछ वाहन तो ऐसे भी है, जिनमें सिस्टम तो लगा है, लेकिन सर्किय नहीं होने से उनकी फिटनेस ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाई है। इसका कारण सर्वर का तैयार नहीं होना है। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि परिवहन विभाग वाहन मालिकों पर सिर्फ जीपीएस और पैनिक बटन लगवाने का ही दबाव बना रहा है।
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बिना सर्वर के जीपीएस
का कोई मतलब नहीं
ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्टर यूनियन के अध्यक्ष विजय कुमार चिब ने कहा कि हम पैनिक बटन और जीपीएस लगाने के खिलाफ नहीं हैं। सरकार पहले इसके लिए सर्वर तैयार करे। बिना सर्वर के वाहनों में जीपीएस लगाने का कोई लाभ नहीं है। विभाग ने वेंडर को जीपीएस और पैनिक बटन लगाने के लिए पंजीकृत तो किया है, लेकिन इसके दाम तय नहीं किए हैं। ट्रांसपोर्टरों को 10 से 12 हजार रुपये में सिस्टम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच लाख के करीब ऐसे वाहन हैं, जिनमें पैनिक बटन और जीपीएस सिस्टम लगाया जाना है। बीते 15 दिनों से बिना जीपीएस और पैनिक बटन वाले वाहनों का पंजीकरण नहीं हो रहा है।
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15 दिन से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं हुआ ऑनलाइन
वाहन चालक बशीर अहमद ने बताया कि विभाग के कहने पर चार अगस्त को उन्होंने जीपीएस और पैनिक बटन लगवाया और पांच को वाहन को फिटनेस पास करवाया, लेकिन 15 दिनों से विभाग फिटनेस सर्टिफिकेट को ऑनलाइन नहीं कर पाया है, जिसके कारण वह वाहन का परिचालन नहीं कर पा रहे हैं। बिना सर्वर तैयार किए ही वाहन चालकों को सिस्टम लगवाने को कहा जा रहा है। इसके लिए सरकार ने कोई दाम भी तय नहीं किए हैं।
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आरटीओ बोले सिस्टम इंस्टॉल करना है
जीपीएस और पैनिक बटन को इंस्टॉल करना है, लेकिन इसको चालू करने में अभी और समय लगेगा। बिना जीपीएस और पैनिक बटन के वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।
- घनशाम सिंह, आरटीओ जम्मू