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अज्ञात बीमारी से कई पशुओं की मौत, शरीर में गांठें, तेज बुखार और सांस भी फूल रही
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अखनूर। सीमावर्ती क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से कई पशुओं की मौत होने से पशुपालक परेशान हैं। मवेशियों को शरीर पर गांठें पड़ने के साथ तेज बुखार आ रहा है, जिसका समय पर उपचार न मिल पाने से मवेशी की जान चली जा रही है। इससे परेशान पशुपालकों ने बीमारी की रोकथाम के लिए सरकार से गुहार लगाई है। अखनूर, खौड़, भलवाल, चौकी चौरा सहित अन्य क्षेत्रों में दो सप्ताह से मवेशी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह रोग बकरियों और दुधारू पशुओं में ज्यादा फैल रहा है।
पशुपालक बोधराज, मंगा राम, रामचंद, ध्यान सिंह आदि ने बताया कि क्षेत्र में पशु अज्ञात बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। दुधारू पशुओं में इसके ज्यादा लक्षण दिख रहे हैं। बीमार होने पर पशुओं की सांस भी फूल रही है । उन्होंने बताया सरकारी अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपचार सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे उन्हें प्राइवेट डॉक्टरों को बुलाना पड़ रहा है। इलाज के अभाव से कई पशुओं की मौत हो चुकी है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस विकराल बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए।
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डॉक्टर की सलाह बीमार मवेशी
को अन्य पशुओं से रखें अलग
पशु चिकित्सक डॉ. अनिल लंगर ने बताया कि पशुओं के शरीर पर गांठें होने के साथ सांस की समस्या आ रही हैं। इस पर समय रहते उपचार पर पशु ठीक हो जाते हैं। पशुपालकों को चाहिए कि बीमार पशु को अन्य पशुओं से अलग रखें और जल्द पशु चिकित्सालय में पहुंचाएं।
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पशुपालक बोधराज, मंगा राम, रामचंद, ध्यान सिंह आदि ने बताया कि क्षेत्र में पशु अज्ञात बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। दुधारू पशुओं में इसके ज्यादा लक्षण दिख रहे हैं। बीमार होने पर पशुओं की सांस भी फूल रही है । उन्होंने बताया सरकारी अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपचार सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे उन्हें प्राइवेट डॉक्टरों को बुलाना पड़ रहा है। इलाज के अभाव से कई पशुओं की मौत हो चुकी है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस विकराल बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए।
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डॉक्टर की सलाह बीमार मवेशी
को अन्य पशुओं से रखें अलग
पशु चिकित्सक डॉ. अनिल लंगर ने बताया कि पशुओं के शरीर पर गांठें होने के साथ सांस की समस्या आ रही हैं। इस पर समय रहते उपचार पर पशु ठीक हो जाते हैं। पशुपालकों को चाहिए कि बीमार पशु को अन्य पशुओं से अलग रखें और जल्द पशु चिकित्सालय में पहुंचाएं।
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