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'कश्मीर के लोगों को मोदी से कोई उम्मीद नहीं'

Thu, 26 Jun 2014 11:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/श्रीनगर
अमर उजाला ब्यूरो/श्रीनगर Updated Thu, 26 Jun 2014 11:57 AM IST
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prime minister narendra and jammu and kashmir

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कश्मीर फ्रंट पर राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद को कोई उम्मीद नहीं है। आजाद का कहना है कि कश्मीर एक संवेदनशील मसला है। सिर्फ फाइलें देखने से कश्मीर के हर तबके और समस्या का पता नहीं लग सकता। बेहतर होगा मोदी पहले नेशनल फ्रंट संभालें। लोकसभा चुनाव से पूर्व सैकड़ों जनसभाओं में मोदी ने हमेशा महंगाई पर कांग्रेस और यूपीए को कोसा था। अब रेलवे किराये में ही 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का झटका दिया है। आगे अब आम बजट पेश होगा। इतना आसान काम नहीं है।

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कश्मीर पंडितों के पुनर्वास पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मोदी नहीं कर रहे, पंडितों के पलायन के बाद हर प्रधानमंत्री ने इसको तवज्जो दी। खुद मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कश्मीरी पंडितों के लिए पैकेज हासिल कर जम्मू के जगटी और श्रीनगर के बडगाम में मकान बनावाए थे।
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कश्मीर में तीन विस्थापित पंडितों के लिए तीन अलग अलग शहर बनाने के मोदी सरकार के प्रस्ताव पर आजाद ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार की सलाह से ही काम होगा।
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कश्मीर में मुख्यधारा के बजाया मुख्य धारा से बाहर भी पंडितों की वापसी के लोग समर्थक हैं। अनुच्छेद 370 पर आजाद ने कहा कि इसे हटाना संभव नहीं। बचपन से इसे वह सुन रहे हैं। अब विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा भाजपा उठाएगी।

बकौल आजाद भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी सबसे बड़े नेता हैं, उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए इस पर कुछ नहीं बोल न किया। प्रधानमंत्री बनने से ही कोई बड़ा नेता नहीं बन जाता। प्रधानमंत्री कोई भी बन सकता है।

मुफ्ती से मुलाकात दोस्ताना
श्रीनगर। गुलाम नबी आजाद ने स्पष्ट किया कि पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद से उनकी मुलाकात सिर्फ दोस्ताना संबंधों तक ही सीमित थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली और कश्मीर की सियासत में यहीं अंतर है।


दिल्ली में राष्ट्रहित और अवाम हित के मुद्दों पर पार्टी लाइन से हटकर एक दूसरे दलों के नेताओं मिलते हैं। ऐसी ही मुलाकात उन्होंने मुफ्ती से की। जाहिर तौर पर देश को सियासी हालात पर चर्चा हुई, लेकिन इसका राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से कोई संबंध नहीं।

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