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J&K: डॉ. कलाम के 14 साल बाद राष्ट्रपति कोविंद पहुंचे सियाचीन, बढ़ाया जवानों का हौसला

Thu, 10 May 2018 11:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Thu, 10 May 2018 11:28 PM IST
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president ramnath kovind reached siachen after fourteen years of apj abdul kalam
रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत एक विशाल देश है। भारतवासियों को अपने देश की एक-एक इंच भूमि से गहरा लगाव है। 76 किलोमीटर की लंबाई और चार से आठ किलोमीटर की चौड़ाई वाला यह सियाचिन ग्लेशियर हमारे देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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राष्ट्र के गौरव का प्रतीक हमारा तिरंगा इस ऊंचाई पर पूरी शान के साथ सदैव लहराता रहे, इसके लिए आप सब बेहद कठिन चुनौतियों का सामना करते हैं। अनेक सैनिकों ने यहां सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। ऐसे सभी बहादुर सियाचिन वॉरियर्स को नमन है।
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सियाचिन बेस कैंप में जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल 1984 में ऑपरेशन मेघदूत के तहत भारतीय सेना ने सियाचिन में प्रवेश किया था। तब से लेकर आज तक आप जैसे वीर जवानों ने मातृभूमि के सबसे ऊंचे इस भूभाग पर शत्रु के कदम नहीं पड़ने दिए हैं।
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आपको यहां प्रकृति से भी रोज कठिन मुकाबला करना पड़ता है। यहां की कुछ चौकियां 20 हजार फु ट से भी अधिक ऊंचाई पर हैं। इस क्षेत्र का तापमान माइनस 52 डिग्री सेंटीग्रेड तक चला जाता है। 15 से 18 फ ीट तक की बर्फ बारी में भी जवान डटे रहते हैं।

इस निर्जन बर्फीले स्थान में हर हाल में आप सब अपना दृढ़ संकल्प बनाए रखते हैं। देश के लिए आप सब में समर्पण की जो भावना है उसे जितना भी सराहा जाए वह कम है। मातृभूमि की रक्षा के लिए आप की निष्ठा सभी देशवासियों के लिए एक आदर्श है। आपके इस मनोबल में पूरे देश का मनोबल जोड़ने और जवानों हौसला बढ़ाने आए हैं।

प्राकृतिक चुनौतियों के बीच जवानों से मिलना गर्व की बात

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सैनिकों से मुलाकात करते हुए कहा कि आज आप सबको यह विश्वास दिलाने आया हूं कि हर देशवासी आपके परिवार की प्रार्थनाओं में, उनके कुशलक्षेम और बेहतर भविष्य के लिए सदैव उनके साथ खड़ा है। मातृभूमि की रक्षा में आप सब हमेशा दृढ़ रहें और आप को हर कदम पर विजय हासिल होती रहे यही मेरी कामना है।

उन्होंने कहा कि आप सभी जवानों और अधिकारियों से मिलने के लिए वे बहुत उत्सुक थे। सियाचिन दुनिया का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित युद्धक्षेत्र है और यहां की कठोरतम जलवायु में सामान्य जीवन जीना ही कठिन है। ऐसी परिस्थिति में दुश्मन से युद्ध के लिए तत्पर रहना बहुत ही मुश्किल होता है।

कठोरतम प्राकृतिक चुनौतियों के बीच देश की रक्षा में लगे ऐसे वीर जवानों से आमने-सामने मिलना उनके लिए गर्व की बात है। आप सबसे मिलने की उत्सुकता का एक विशेष कारण था, आप तक यह संदेश पहुंचाना था कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सभी सैन्य कर्मियों और अधिकारियों के लिए हर भारतवासी के दिल में विशेष सम्मान है। देशवासियों के हृदय में आपकी वीरता के प्रति गर्व का भाव भी है।

इसलिए आज आप सबसे मिलकर बेहद खुशी हो रही है। इससे पहले थ्वाइस एयरफील्ड पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, नार्दर्न कमांड के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डी अनबू भी थे।

सियाचिन के जवानों से मिलने का संकल्प हुआ पूरा
जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में सैन्य बलों के लिए पूरे देश का आभार संदेश लेकर आए हैं। राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद दिल्ली से बाहर अपनी सबसे पहली यात्रा पर अपने सैनिकों से मिलने लद्दाख आया था।

सभी तैनात बटालियनों और स्काउट रेजीमेंट सेंटर के वीर जवानों से मिला था। उस समय ही संकल्प लिया था कि वे सियाचिन में तैनात अपने सैनिकों से भी मिलने जाएंगे। आज आप सभी के बीच आकर वह संकल्प पूरा हो रहा है।

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